66 वर्षीय महिला को गंभीर हार्ट वाल्व लीकेज से मिली राहत, पारस हेल्थ पंचकूला में सफल माइट्राक्लिप प्रक्रिया

पांचवा आयाम (राकेश मिश्रा):पंचकूला:पारस हेल्थ पंचकूला के डॉक्टरों ने 66 वर्षीय सरोज उप्पल के गंभीर माइट्रल वाल्व लीकेज का सफलतापूर्वक माइट्राक्लिप प्रक्रिया से इलाज किया। मरीज को गंभीर माइट्रल रिगर्जिटेशन, बार-बार हार्ट फेलियर और कमजोर हृदय की समस्या थी। अधिक सर्जिकल जोखिम के कारण उनके लिए पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी उपयुक्त नहीं थी।मरीज को डायबिटीज थी और दो बार हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी व स्टेंटिंग हो चुकी थी। बाद में माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज विकसित हुआ और हार्ट फेलियर के कारण उन्हें तीन बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जांच में पता चला कि कमजोर और बढ़े हुए हृदय के कारण वाल्व ठीक से बंद नहीं हो पा रहा था, जिससे खून पीछे की ओर जाने लगा था।पारस हेल्थ पंचकूला के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के चेयरमैन डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा, “यह एक हाई-रिस्क मरीज थी, जिसका हृदय काफी कमजोर था और बार-बार हार्ट फेलियर हो रहा था। ऐसे मामलों में माइट्राक्लिप एक महत्वपूर्ण मिनिमली इनवेसिव इलाज विकल्प हो सकता है। इस प्रक्रिया से मरीज का गंभीर वाल्व लीकेज बहुत कम स्तर तक आ गया और तीन महीने में उनकी स्थिति में अच्छा सुधार देखा गया।”मरीज का ट्रांसकैथेटर माइट्रल वाल्व रिपेयर माइट्राक्लिप तकनीक से किया गया। 3डी ट्रांसइसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी और एक्स-रे इमेजिंग की मदद से लगभग डेढ़ घंटे में प्रक्रिया पूरी हुई। इसमें ओपन-हार्ट सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी।प्रक्रिया के बाद माइट्रल वाल्व का गंभीर लीकेज बहुत कम होकर नगण्य स्तर पर आ गया। तीन महीने के फॉलो-अप में मरीज को सांस लेने में परेशानी नहीं थी और ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर भी बेहतर नियंत्रित रहे। उनकी जीवन गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।पारस हेल्थ ग्रुप के सीओओ विनीत अग्रवाल ने कहा कि पंचकुला में माइट्राक्लिप प्रक्रिया की शुरुआत स्ट्रक्चरल हार्ट केयर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, पारस हेल्थ पंचकूला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने इसे अस्पताल की एडवांस्ड कार्डियक सुविधाओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।माइट्राक्लिप एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें कैथेटर के जरिए माइट्रल वाल्व पर एक छोटी क्लिप लगाई जाती है। इससे वाल्व को बेहतर तरीके से बंद होने में मदद मिलती है और खून के पीछे की ओर बहने को कम किया जाता है। यह प्रक्रिया ऐसे चुनिंदा मरीजों के लिए महत्वपूर्ण इलाज विकल्प है, जिनमें पारंपरिक सर्जरी का जोखिम अधिक होता है।

⚡ SHARE THIS POST
  • Related Posts

    नाथपा बांध से 520 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ा जाएगा, नदी-नालों से दूर रहने की अपील

    शिमला (दिव्या राणा) नाथपा बांध में रेडियल गेट नंबर-3 के रखरखाव कार्य के चलते 31 अगस्त 2026 को अपराह्न 3:30 बजे से 4:30 बजे तक लगभग 520 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी…

    साइबर ठगी के 2.27 लाख रुपये लौटाए, चार पीड़ितों को राहत—अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण

    पांचवा आयाम ( जसबीर/ सच कीरत सिंह) अयोध्या:साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए अयोध्या साइबर क्राइम थाना पुलिस ने चार शिकायतों में फंसी 2,27,251 रुपये की धनराशि…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *