मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में नशे पर एक शब्द नहीं कहा, क्या नशा कानून व्यवस्था में नहीं आता: अदित्य देवीलाल

चंडीगढ़ (राजकुमार) विधान सभा में इंडियन नेशनल लोकदल के विधायक दल के नेता अदित्य देवीलाल और विधायक अर्जुन चौटाला की तरफ से प्रदेश में बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था पर दिए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर नोटिस देते हुए कहा कि हम बीजेपी सरकार का प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि राज्य के विभिन्न जिलों में हत्या, लूट, डकैती, फिरौती, मानव तस्करी, दलित महिलाओं के विरूद्ध अपराध आदि को लेकर जनता में भय और असुरक्षा का वातावरण है। इस पर सरकार अपना वक्तव्य दे।
अदित्य देवीलाल ने अपना सप्लीमेंट्री प्रश्न पूछते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपना पूरा भाषण पढ़ दिया और पूर्व की सरकारों के आंकड़े तो दे दिए लेकिन खुद की सरकार के आंकड़े नहीं दिए। बढ़ते नशे पर एक शब्द नहीं बोला। क्या नशा कानून व्यवस्था में नहीं आता? आज प्रदेश का कोई गांव और शहर नहीं बचा है जहां चिट्टा नहीं बिक रहा है। आज तक कब कहां और कितना नशा पकड़ा गया? नशा तस्कर जो हमारे युवाओं को तबाह कर रहे हैं उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? सिरसा की एक घटना का जिक्र करते हुए अदित्य ने कहा कि पुलिस ने बड़ी मात्रा में अफीम पकड़ी और उसमें से अफीम निकाल ली। हालत यह है कि नशा पकड़ कर पुलिस वाले ही उस नशे को बेच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अपराध के ग्राफ में ढाई प्रतिशत की कमी आई है। इस पर आंकड़े देते हुए कहा कि बीजेपी के राज में अब तक 7 हजार हत्याएं, 57 हजार महिलाओं के विरूद्ध अपराध, 8 हजार दलितों के खिलाफ अपराध, 9 हजार सेंधमारी और झपटमारी के अपराध, 1500 से अधिक बलात्कार के अपराध हो चुके हैं। थानों और तहसीलों में सरेआम पैसों का लेनदेन हो रहा है। क्या ये सब अपराध में शामिल नहीं हैं?मुख्यमंत्री ने चैट जीपीटी का लिखा हुआ जवाब दे दिया: अर्जुन चौटालाविधायक अर्जुन चौटाला ने ध्यानाकर्षण पर बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने बताया कि 2001 से 2005 के बीच क्या क्या हुआ पर यह नहीं बताया कि बीजेपी का उस समय इनेलो की सरकार को बिना शर्त के समर्थन था। तब चौटाला साहब का राज आपको अच्छा लगता था। आज कह रहे हैं कि उस समय पर हादसे हुए थे, हादसे तो किसी भी सरकार में हो सकते हैं। सप्लीमेंट्री प्रश्न पूछते हुए अर्जुन चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो डाटा दिया है उसमें कहीं 2 प्रतिशत और कहीं 3 प्रतिशत अपराध में कटौती दिखाई है। जबकि सरकार को यह बताना चाहिए था कि प्रतिवर्ष कितने अपराध हुए हैं ताकि पता चल सके कि अपराध कम हुए हैं या बढ़े हैं। ये तो मुख्यमंत्री ने चैट जीपीटी का लिखा हुआ जवाब दे दिया। चैट जीपीटी को छोड़ो और अधिकारियों को सही आंकड़े निकालने पर लगाओ।

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