सातवें टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड समारोह में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के शिक्षक हुए सम्मानित

मोहाली (तानिया रोहिल्ला)। किसी ने कक्षाओं की चारदीवारी से बाहर निकलकर झुग्गियों और वंचित बस्तियों के बच्चों के हाथों में किताबें थमाईं, किसी ने विद्यार्थियों को अंतरिक्ष की दुनिया से रूबरू कराने के लिए अपनी जेब से स्कूल में एयरोस्पेस पार्क खड़ा कर दिया। किसी ने अपने प्रयासों से बदहाल स्कूल की तस्वीर बदलकर वहां विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई तो किसी ने दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षा की रोशनी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का हौसला दिया। शिक्षा को महज नौकरी नहीं, बल्कि बदलाव का माध्यम मानकर काम करने वाले ऐसे ही 11 असाधारण शिक्षकों को शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मौका था मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स की ओर से डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित सातवें टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड समारोह का। समारोह में ट्राईसिटी के अलावा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के उन शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने नवाचार, समर्पण और सामाजिक सरोकारों से शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2018 से आयोजित हो रहा यह सम्मान समारोह ऐसे शिक्षकों को मंच देने की पहल है, जो अपने नियमित दायित्वों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों और समाज के लिए उल्लेखनीय काम कर रहे हैं।मानव मंगल स्मार्ट स्कूल, सेक्टर-64 के सभागार में आयोजित समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। लेडी गवर्नर मित्रा घोष भी समारोह में मौजूद रहीं। मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर संजय सरदाना, एसोसिएट डायरेक्टर्स संकल्प सरदाना और समर्थ सरदाना तथा डॉ. जीसी मिश्रा मेमोरियल एजुकेशन एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मयंक मिश्रा भी इस मौके पर मौजूद थे। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद मानव मंगल स्मार्ट स्कूल के स्टूडेंट्स ने शिक्षक दिवस को समर्पित विशेष प्रस्तुति दी। शिक्षकों की इस प्रस्तुति को अतिथियों और सभागार में मौजूद लोगों ने खूब सराहा। मंच का संचालन उमा महाजन और पुष्पिंदर कौर ने किया।इस मौके पर मुख्य अतिथि प्रो. असीम कुमार घोष ने शिक्षक समुदाय का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाने के लिए केवल शिक्षक की भूमिका तक सीमित न रहें, बल्कि उनके मार्गदर्शक, आदर्श और प्रेरणास्रोत के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने शिक्षकों का सम्मान करता है, वही अपने भविष्य को सुरक्षित करता है।राज्यपाल ने कहा कि हम जीवन बचाने वाले डॉक्टरों, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले इंजीनियरों तथा नवाचार और अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिकों का सम्मान करते हैं, लेकिन इन सभी की सफलता की नींव उस शिक्षक द्वारा रखी जाती है, जो उन्हें उस समय तैयार करता है, जब दुनिया उनके नाम से भी परिचित नहीं होती।प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र का निर्माण करता है, उनमें जिज्ञासा जगाता है तथा उन्हें सपने देखने का आत्मविश्वास और उन्हें साकार करने का साहस भी प्रदान करता है।पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनका समर्पण और योगदान, जो अक्सर बिना किसी सार्वजनिक पहचान के कक्षाओं में निरंतर जारी रहता है, देश की शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक रीढ़ है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार समाज की ओर से शिक्षकों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल उपकरण भले ही ज्ञान तक पहुंचने और उसे साझा करने के तरीकों को बदल रहे हों, लेकिन तकनीक कभी भी एक अच्छे शिक्षक के मानवीय स्पर्श, सहानुभूति, विवेक और नैतिक मार्गदर्शन का स्थान नहीं ले सकती।टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड्स से सम्मानित होने वाले 11 शिक्षकों में गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-33, चंडीगढ़ की लेक्चरर (मैथ्स) अमिता रानी, केंद्रीय विद्यालय, सेक्टर-31, चंडीगढ़ के म्यूजिक टीचर मंगलेश कुमार, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल, पीएयू, लुधियाना (पंजाब) की साइंस मिस्ट्रेस हरप्रीत कौर, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खटोदरा, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) के फिजिकल एजुकेशन टीचर मनोज कुमार, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल, बगाहर, कोटखाई, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश) में जेबीटी निशा शर्मा, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के बायोकैमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर डॉ. रजत संधीर, गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज, सेक्टर-32, चंडीगढ़ की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूचि शर्मा, स्कूल ऑफ एमिनेंस, फाजिल्का (पंजाब) के लेक्चरर (हिस्ट्री) विजय कुमार, मानव मंगल हाई स्कूल, सेक्टर-21, चंडीगढ़ की मैथ्स टीचर दीपिंदर कौर और गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-35, चंडीगढ़ में जेबीटी समीर शामिल हैं। इनमें से विजय कुमार दिव्यांग हैं जबकि मंगलेश कुमार दृष्टिहीन हैं। इनके अलावा भवन विद्यालय, सेक्टर-27 की सीनियर प्रिंसिपल विनीता अरोड़ा को समारोह में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।खुद से पैसों से स्कूल में बना दिया एयरोस्पेस पार्कगवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-33 की मैथ्स लेक्चरर अमिता रानी ने 24 वर्षों से अधिक के शिक्षण अनुभव में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए अपने निजी संसाधनों से स्कूल परिसर में एयरोस्पेस पार्क तैयार किया। गणितीय मॉडलिंग के क्षेत्र में उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विज्ञान प्रदर्शनियों और चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस में उनके मॉडलों को सराहना मिली। अनुभवात्मक गणित शिक्षण की रिसोर्स पर्सन के रूप में भी उन्होंने विद्यार्थियों में रचनात्मक और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में योगदान दिया है।झुग्गियों के 5 हजार बच्चों तक पहुंचाई शिक्षा की रोशनीहरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के खटोदरा स्थित गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के फिजिकल एजुकेशन टीचर मनोज कुमार ने शिक्षा को नौकरी नहीं, मिशन बना लिया। उन्होंने झुग्गियों और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए दो जिलों में 30 से अधिक स्लम स्कूल शुरू किए, जिनमें 5 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए उनकी पहल के तहत बच्चों ने करीब 50 हजार पौधे लगाए। इसके अलावा उन्होंने वंचित परिवारों की 3 हजार से अधिक बेटियों को सिलाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिलाया, जिनमें करीब 500 युवतियां स्वरोजगार से जुड़ सकीं। शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उनके इसी उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।उपेक्षित स्कूल में जगाई शिक्षा की अलख गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल, बगाहर, कोटखाई (शिमला) की जेबीटी निशा शर्मा ने अपनी लगन, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प से एक उपेक्षित स्कूल की तस्वीर बदल दी। जब उन्होंने स्कूल में काम शुरू किया, तब न भवन था, न बेंच और न ब्लैकबोर्ड। महज तीन बच्चों की पढ़ाई गोशाला में होती थी। निशा ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू कीं और शिक्षण का माध्यम अंग्रेजी किया। उन्होंने स्कूल में बच्चों के अनुकूल और आनंददायक माहौल तैयार किया। धीरे-धीरे उनके प्रयास रंग लाए और विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 50 हो गई। आज स्कूल में स्मार्ट कक्षाएं, कंप्यूटर शिक्षा और विभिन्न सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां के बच्चे अब प्रतिष्ठित निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ भी आत्मविश्वास से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।500 से अधिक विद्यार्थियों को दिखाई सैन्य संस्थानों की राहगवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल-35 के जेबीटी शिक्षक समीर ने विद्यार्थियों को सैन्य संस्थानों में प्रवेश दिलाने को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। वर्ष 2018 से वह सैन्य स्कूलों में प्रवेश के इच्छुक बच्चों को लगातार मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दे रहे हैं। अब तक 500 से अधिक विद्यार्थियों को तैयार कर चुके समीर के 25 शिष्यों का चयन देहरादून स्थित राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) में हो चुका है। उनके कई अन्य विद्यार्थी राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूलों, सैनिक स्कूलों और महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट में भी चयनित हुए हैं। सैनिक के बेटे समीर विद्यार्थियों में अनुशासन, साहस, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार विकसित करने पर विशेष जोर देते हैं। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल किसी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश पाना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक और भावी सैन्य नेतृत्वकर्ता तैयार करना है, जो देशसेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाएं।दिव्यांगता को पीछे छोड़ डिजिटल शिक्षा को बनाया अपनी राहफाजिल्का के स्कूल ऑफ एमिनेंस में हिस्ट्री के लेक्चरर विजय कुमार ने तकनीक और नवाचार को अपनी शिक्षण पद्धति का अभिन्न हिस्सा बनाकर हिस्ट्री जैसे विषय को विद्यार्थियों के लिए अधिक रोचक और जीवंत बनाया है। दो दशक से अधिक के शिक्षण अनुभव के दौरान उन्होंने डिजिटल टूल्स और मल्टीमीडिया के माध्यम से पारंपरिक शिक्षण को नए आयाम देने के निरंतर प्रयास किए। वह यूट्यूब चैनल के जरिए भी विद्यार्थियों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचा रहे हैं। दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। तकनीक के प्रति उनकी जिज्ञासा, शिक्षण के प्रति समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने का उनका जज्बा उन्हें एक प्रेरक शिक्षक बनाता है

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