पांचवा आयाम (जसबीर/ सच कीरत सिंह) : अयोध्या अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर सीओ परिसर में जनपद के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए निशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ. रंजना गुप्ता की मौजूदगी में पुलिसकर्मियों को मूक-बधिर समुदाय से संवाद स्थापित करने के लिए सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिया गया। इंटरप्रेटर वाणी शुक्ला तथा मूक-बधिर संस्था के वाइस प्रेसिडेंट गुरदीप सिंह की टीम ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा के संकेतों और उनके प्रयोग की जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य जरूरत के समय मूक-बधिर लोगों की बात समझने, उनकी समस्याएं सुनने और उन्हें सहज पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पुलिसकर्मियों को सक्षम बनाना रहा। डॉ. रंजना गुप्ता ने कहा कि सांकेतिक भाषा केवल इशारों का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं को समझने और दिलों को जोड़ने वाली भाषा है। पुलिसकर्मी जब इन संकेतों को समझेंगे तो मूक-बधिर नागरिक अपनी बात अधिक सहजता से पुलिस तक पहुंचा सकेंगे। संवेदनशील पुलिसिंग का अर्थ है कि मदद मांगने वाले हर व्यक्ति तक संवाद और भरोसा पहुंचे। वाणी शुक्ला ने कहा कि मूक-बधिर समुदाय की भावनाओं और जरूरतों को समझने में सांकेतिक भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुलिसकर्मियों का यह प्रशिक्षण समाज में समावेश और संवेदना की भावना को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि एक छोटा सा संकेत भी किसी जरूरतमंद के लिए मदद और भरोसे का बड़ा माध्यम बन सकता है। गुरदीप सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा सांकेतिक भाषा सीखना मूक-बधिर समुदाय के लिए सम्मान और अपनत्व का संदेश है। इससे संवाद की वह दूरी कम होगी, जो कई बार जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी समस्या बताने से रोकती है। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए पुलिस विभाग के प्रयासों की सराहना की और इसे संवेदनशील समाज की दिशा में सार्थक कदम बताया। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण लिया। पहल का उद्देश्य पुलिस सेवा को अधिक सहज, संवेदनशील और सर्वसमावेशी बनाते हुए हर नागरिक तक सुरक्षा और भरोसे का संदेश पहुंचाना रहा।






