पीएचडीसीसीआई ने किया यंग आर्किटेक्ट फोरम का गठन

चंडीगढ़ : पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित 12वें इन्स-आउट एक्सपो के तहत युवा आर्किटेक्ट्स के लिए एक विशेष पहल करते हुए यंग आर्किटेक्ट फोरम का गठन किया गया है। जिसके माध्यम से उभरते आर्किटेक्ट्स, अनुभवी आर्किटेक्ट्स और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर वास्तुकला के क्षेत्र में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। रविवार को यहां आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएचडीसीसीआई चंडीगढ़ चैप्टर के को-चेयर सुव्रत खन्ना ने कहा कि ‘यंग आर्किटेक्ट फोरम’ का गठन युवा आर्किटेक्ट्स और छात्रों को ऐसा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है, जहां वे आर्किटेक्चर के क्षेत्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद पेशे में प्रवेश करते समय और काम के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कर सकें तथा उनके व्यावहारिक समाधान तलाश सकें। फोरम का उद्देश्य युवा पेशेवरों को अनुभवी आर्किटेक्ट्स के साथ संवाद करने, विचारों का आदान-प्रदान करने, बदलती पेशेवर कार्यप्रणाली को समझने तथा तकनीक और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं से पैदा हो रहे नए अवसरों को तलाशने में मदद करना है। यंग आर्किटेक्ट फोरम के संयोजक आर्किटेक्ट सुकुमार जयरथ ने कहा कि फोरम के माध्यम से युवा आर्किटेक्ट्स से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और संवाद को आगे बढ़ाया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए वाईएएफ की आर्किटेक्ट कनिका बंसल ने कहा कि युवा आर्किटेक्ट्स को चैट जीपीटी, मेटा, जैमिनी आदि जैसी नई तकनीकों को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को ऐसे अवसरों के रूप में देखा जाना चाहिए, जो रचनात्मकता, शोध, कार्यक्षमता और पेशेवर कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं। एक महत्वपूर्ण सत्र में प्रसिद्ध आर्किटेक्ट यतिन पांड्या ने डिजाइनिंग फॉर द प्लेस, पीपल एंड प्लैनेट विषय पर विचार रखे। उन्होंने वास्तुकला, लोगों और पर्यावरण के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए ऐसे डिजाइनों के महत्व को रेखांकित किया, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की अवधारणा केवल एक नारा बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे सार्थक और जन-केंद्रित शहरी विकास में परिवर्तित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसका संचालन आर्किटेक्ट दीपिका गांधी ने किया, जबकि आर्किटेक्ट प्रिया गुप्ता, आर्किटेक्ट जितेश मलिक और आर्किटेक्ट मोहित विज पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। चर्चा में वास्तुकला की शिक्षा और पेशेवर कार्यप्रणाली के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। आर्किटेक्ट कलापी बुच ने भारतीय सांस्कृतिक जड़ों और समकालीन वास्तुकला के बीच संबंध तथा आधुनिक वास्तु अभिव्यक्ति में भारतीय मूल्यों और परंपराओं के समावेश पर चर्चा की।

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