झज्जर : (राजकुमार) हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन लोककलाओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से गांव कासनी में कासनी समाज कल्याण सेवा समिति की ओर से सांझी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 10 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से सांझी जैसी पारंपरिक लोककला को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान किया गया। प्रतियोगिता ने हरियाणवी संस्कृति के प्रति ग्रामीणों के जुड़ाव और अपनी परंपराओं को जीवित रखने के संकल्प को भी उजागर किया।हरियाणा की पारंपरिक सांझी कला ग्रामीण जीवन और लोक आस्था से जुड़ी एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा है। इसे तैयार करने में कला, धैर्य, कल्पनाशीलता और कई दिनों की मेहनत लगती है। परंपरागत रूप से दीवार पर गोबर की सहायता से सांझी की आकृति बनाई जाती है। इसके बाद पहले से बने चिकनी मिट्टी के हाथ, मुंह और पैर सहित विभिन्न अंगों को और बीच-बीच में मिट्टी से बने सितारे और दूसरी सजावटी आकृतियां लगाई जाती हैं तथा उन पर विभिन्न रंगों से आकर्षक सजावट की जाती है। इस प्रकार दीवार पर उकेरी गई सांझी केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की कला, परंपरा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रतीक बन जाती है। आधुनिकता के दौर में ऐसी पारंपरिक कलाओं को सहेजना और नई पीढ़ी को इनसे परिचित कराना बेहद जरूरी है।प्रतियोगिता में रामकिशन की पत्नी पूनम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि राजबीर की पत्नी गुड्डी उर्फ कृष्णा दूसरे और सुदीप की पत्नी सीमा तीसरे स्थान पर रहीं। समिति की ओर से प्रथम विजेता पूनम को 3,100 रुपये तथा हरियाणवी संस्कृति फैन्स क्लब के ओनर रणवीर धनखड़ की ओर से 1,100 रुपये की अतिरिक्त पुरस्कार राशि प्रदान की गई। द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली गुड्डी उर्फ कृष्णा को समिति की ओर से 2,100 रुपये तथा रणवीर धनखड़ की ओर से 500 रुपये दिए गए। तृतीय स्थान पर रहीं सीमा को समिति की ओर से 1,100 रुपये तथा हरियाणवी संस्कृति फैन्स क्लब की ओर से 200 रुपये की राशि प्रदान की गई। अन्य छह प्रतिभागियों को भी पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।विजेता प्रतिभागियों ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि सांझी तैयार करना केवल प्रतियोगिता में भाग लेने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनकी पिछले 15 दिनों की लगातार मेहनत, लगन और रचनात्मकता जुड़ी हुई थी। दीवार पर सांझी की आकृति तैयार करने से लेकर मिट्टी से अलग-अलग अंग बनाने, सितारों से सजावट करने और रंग भरने तक हर चरण में समय और धैर्य लगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में स्थान प्राप्त करना उनकी मेहनत का परिणाम है, लेकिन सबसे बड़ी खुशी अपनी पारंपरिक कला को सहेजने और उसे लोगों के सामने प्रस्तुत करने की है। इस तरह के आयोजन महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।कासनी समाज कल्याण सेवा समिति के प्रधान दिलबाग थानेदार ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति हमारी पहचान, हमारी परंपरा और हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। सांझी जैसी पारंपरिक कलाएं हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हुई हैं, लेकिन आधुनिकता के दौर में कहीं न कहीं ये परंपराएं पीछे छूटती जा रही हैं। समिति का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से पुरानी लोककलाओं को जीवित रखना, महिलाओं की प्रतिभा को सम्मान देना और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि संस्कृति का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।इस कार्यक्रम में विषेश तौर पर आई विदधा देवी, ओनर एचपी गैस एजेंसी, झज्जर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सांझी प्रतियोगिता जैसे आयोजन हमारी प्राचीन परंपराओं को नई पहचान देते हैं। इन्हें सहेजने के लिए महिलाओं, युवाओं और सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देती हैं और लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना पैदा करती हैं।गांव की सरपंच अनिल देवी ने भी सांझी प्रतियोगिता को हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम बताया। उन्होंने कहा कि गांव की परंपराओं, लोककलाओं और पुराने रीति-रिवाजों को जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन गांव में सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी और प्रतिभा को भी प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने इस प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि गांव की पुरानी परंपराएं केवल यादों तक सीमित न रहें, बल्कि व्यवहार में भी जीवित रहें।कार्यक्रम में विजेता प्रतिभागियों के साथ अन्य प्रतिभागियों को भी सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। हरियाणवी संस्कृति फैन्स क्लब और ग्राम पंचायत कासनी की ओर से भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने में सहयोग दिया गया। आयोजन के दौरान यह संदेश उभरकर सामने आया कि लोककलाओं को बचाने के लिए केवल उनकी प्रशंसा करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें अभ्यास, प्रतियोगिताओं और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से जीवंत बनाए रखना भी जरूरी है।सांझी प्रतियोगिता के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हरियाणवी संस्कृति केवल गीत-संगीत और पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हमारी लोककलाएं, पारिवारिक संस्कार, पारंपरिक शिल्प और सामूहिक जीवन की भावना भी समाहित है। कासनी समाज कल्याण सेवा समिति की यह पहल ग्रामीण स्तर पर सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, महिलाओं की कला को पहचान दिलाने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। ऐसी पहलें ही हमारी लोकपरंपराओं को नई ऊर्जा देकर हरियाणवी संस्कृति की पहचान को आने वाले समय तक कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।






