
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि टॉयलेट सीट को लोग नियमित रूप से फिनाइल, डिसइंफेक्टेंट और क्लीनर से साफ करते हैं, जबकि किचन स्पंज को अक्सर केवल पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है। स्पंज की सतह में छोटे-छोटे छेद होते हैं, जहां बैक्टीरिया आसानी से छिप जाते हैं और तेजी से बढ़ते हैं। यही कारण है कि कई बार स्पंज में टॉयलेट सीट से भी ज्यादा कीटाणु पाए जाते हैं।किचन स्पंज में कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जैसे:ई. कोलाई (E. coli)साल्मोनेला (Salmonella)स्टैफिलोकोकस (Staphylococcus)कैंपिलोबैक्टर (Campylobacter)किचन स्पंज का उपयोग बर्तन साफ करने, तेल-चिकनाई हटाने और खाने के अवशेष साफ करने के लिए किया जाता है। इस्तेमाल के बाद स्पंज अक्सर गीला ही पड़ा रहता है। यह नमी बैक्टीरिया,फंगस और कीटाणुओं को तेजी से बढ़ने का मौका देती है। खासकर भारतीय रसोई में मसाले, तेल, दूध, दाल और कच्ची सब्जियों के कण स्पंज में फंस जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया की संख्या और बढ़ जाती है।रिसर्च क्या कहती है?जर्मनी में हुई एक प्रसिद्ध रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इस्तेमाल किए गए किचन स्पंज की जांच की। शोधकर्ताओं को स्पंज में करोड़ों की संख्या में बैक्टीरिया मिले। कुछ बैक्टीरिया ऐसे भी थे जो संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। रिसर्च में यह भी बताया गया कि कई बार स्पंज में मौजूद बैक्टीरिया की मात्रा टॉयलेट सीट से ज्यादा पाई गई। अमेरिका और यूरोप की कई स्टडी में भी यह सामने आया कि किचन स्पंज घर की सबसे दूषित वस्तुओं में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार गीला और लंबे समय तक इस्तेमाल किया गया स्पंज बैक्टीरिया का “हॉटस्पॉट” बन जाता है।बैक्टीरिया का घर: एक अध्ययन के अनुसार, स्पंज में 360 से अधिक विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं।क्रॉस-कंटैमिनेशन (Cross-contamination): अगर आप स्पंज का इस्तेमाल कच्चे मांस के रस या सिंक को साफ करने के लिए करते हैं, तो वही बैक्टीरिया बर्तनों और हाथों के जरिए आपके खाने तक पहुंच सकते हैं।बीमारियों का जोखिम: दूषित स्पंज के संपर्क में आने से पेट में संक्रमण, डायरिया, फूड पॉइजनिंग और किडनी इंफेक्शन तक का खतरा बढ़ जाता है।स्पंज से सुरक्षित कैसे रहें?नियमित सफाई (Disinfect): स्पंज को बैक्टीरिया-मुक्त रखने के लिए हर 2-3 दिन में उसे गीला करके 1 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें, या डिशवॉशर में गर्म चक्र (hot cycle) पर धोएं।रोजाना सुखाएं: इस्तेमाल के बाद स्पंज को अच्छी तरह निचोड़ें और उसे किसी सूखी जगह पर रखें। इसे कभी भी गीला या बंद सिंक के नीचे न छोड़ें।कब बदलें: बैक्टीरिया से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि हर 1 से 2 सप्ताह में अपना स्पंज बदल दें। यदि स्पंज से बदबू आने लगे या वह फट जाए, तो उसे तुरंत फेंक दें।विकल्प चुनें: आप पारंपरिक स्पंज की जगह सिलिकॉन स्क्रबर (Silicone Scrubbers) का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि इनमें नमी नहीं रुकती और बैक्टीरिया पनपने का खतरा बेहद कम होता है।







