चंडीगढ़ (तानिया रोहिल्ला) -हरियाणा सरकार प्रदेश को कारोबार और निवेश के लिए अधिक अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नियामकीय सुधारों के साथ-साथ सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को उद्यमियों के अनुकूल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके लिए राज्य सरकार 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम कर रही है। यह जानकारी आज अनुपालन में कमी लाने और नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण से जुड़े अभियान के दूसरे चरण के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए हुई उच्चस्तरीय बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक और हरियाणा के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने की। बैठक के दौरान के.के. पाठक ने भवन निर्माण उप-नयमों को सरल बनाने तथा नियामकीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के हरियाणा के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण संबंधी नियमों को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाने से अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कारोबारी सुगमता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को दूर करने, कारोबारी सुगमता में सुधार लाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से 28 सूत्रीय सुधार एजेंडा पर काम कर रही है। औद्योगिक विकास, भूमि संबंधी नियमों, भवन निर्माण की मंजूरी, श्रम सुधारों, बिजली कनेक्शन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक-केंद्रित सेवाओं सहित विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।उन्होंने बताया कि अब तक आठ सुधार प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं, जबकि 18 प्रस्तावों पर सहमति बनने के बाद उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जटिल और अनुमति-आधारित नियामकीय व्यवस्था को सरल एवं पूर्वानुमेय प्रणाली में बदलना है, ताकि उद्यमी अधिक विश्वास के साथ अपने कारोबार में निवेश कर सकें, उसका विस्तार कर सकें और संचालन कर सकें। उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण विधायी पहल के तहत राज्य विधानसभा द्वारा गत 01 सितंबर को हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 को पारित किया गया। यह पहल नए उद्यमों के लिए प्रक्रियागत औपचारिकताओं को कम करने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अधिक सहयोगी वातावरण तैयार करने के सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। निवेशकों की सुविधा के लिए हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक मॉडल टाउनशिप में खाली औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित शर्तों और शुल्क के अधीन पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक भूखंडों के आवंटियों को एचएसआईआईडीसी की पूर्व अनुमति के बिना अनुमत औद्योगिक गतिविधियों से संबंधित परियोजनाओं में बदलाव करने की सुविधा दी गई है। ऐसे मामलों में संबंधित एस्टेट मैनेजर को केवल सूचना देना आवश्यक होगा और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। राज्य सरकार भूमि उपयोग की ऐसी आधुनिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है, जो मांग पर आधारित हो और जिसमें उन गतिविधियों की अनुमति देने का सिद्धांत अपनाया जाए, जिन पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध न हो। इस पहल का उद्देश्य आवश्यक नियोजन संबंधी सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए भूमि उपयोग में अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इसके साथ ही, भवन और निर्माण संबंधी अनुमतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। साथ ही अग्नि सुरक्षा नियमों की समीक्षा भी की जा रही है। श्रम सुधारों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चैबीसों घंटे संचालित करने की सुविधा प्रदान करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की हैं। इसके साथ ही, निर्धारित शर्तों के अधीन महिलाओं को रात्रि पाली में रोजगार देने से संबंधित प्रावधानों में भी संशोधन किए गए हैं। इन उपायों से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर बढ़ने और कारोबारियों को संचालन में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है। बैठक में मुख्यमंत्री के ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्त प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।







