पांचवा आयाम ( जसबीर/ सच कीरत सिंह) बीकापुर/अयोध्या। नवरात्रि की आस्था और रामलीला के धार्मिक उत्सव के बीच बीकापुर पुलिस ने शांति, मर्यादा और सामाजिक अनुशासन का संदेश देने की पहल की है। बीकापुर कोतवाल देवेंद्र पांडे ने दुर्गा पूजा पंडालों और रामलीला स्थलों से जुड़े समिति पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को मांस, मदिरा और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की शपथ दिलाई।सरल भाषा में दिलाई गई शपथ में लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं मांस-मदिरा और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे और ऐसे पदार्थों का सेवन करने वाले किसी व्यक्ति को पंडाल परिसर में प्रवेश नहीं देंगे। इस दौरान मौजूद लोगों ने हाथ उठाकर शपथ का पूरी निष्ठा से पालन करने का भरोसा दिलाया।
कोतवाल देवेंद्र पांडे ने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का अवसर भी हैं। उन्होंने समितियों से अपील की कि पंडालों और रामलीला स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और धार्मिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाए।उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुर्गा पूजा और रामलीला समितियों के पदाधिकारियों के साथ क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों को एक साझा व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ने की पहल की है। इसका उद्देश्य किसी भी छोटी-बड़ी सूचना को समय रहते पुलिस तक पहुंचाना और अराजक तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखना है।देवेंद्र पांडे ने कोतवाली क्षेत्र के दूर-दराज और अंतिम छोर तक लगने वाले छोटे-बड़े दुर्गा पूजा पंडालों को भी समान महत्व देने पर जोर दिया। इसके लिए कस्बे समेत पूरे क्षेत्र की विभिन्न समितियों को जोड़कर एक केंद्रीय समिति बनाई गई है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों की समितियां अपनी समस्याएं और आवश्यकताएं केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगी।उन्होंने समितियों से आपसी समन्वय बनाए रखने, अफवाहों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की। साथ ही आयोजकों को यह संदेश दिया कि त्योहार की खुशी के बीच कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द की जिम्मेदारी भी सभी की साझा है।नवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था के साथ अनुशासन, नशामुक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाली देवेंद्र पांडे की इस पहल की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। पुलिस और आयोजन समितियों के बीच संवाद बढ़ाने की यह कोशिश आगामी धार्मिक आयोजनों को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।







