पांचवा आयाम ( जसबीर/सच कीरत सिंह) अयोध्या:शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन अयोध्या कैंट स्थित आदि शक्ति मां पाटेश्वरी देवी मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया। मंदिर में सजे मां के दरबार में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की। महिलाओं, बच्चों और अन्य भक्तों की उपस्थिति से मंदिर परिसर भक्तिमय नजर आया। मां के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से शीश नवाया और देवी का आशीर्वाद मांगा।मंदिर अध्यक्ष राम यश यादव ने हमारे संवाददाता को बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नवरात्रि के अवसर पर मां का दरबार श्रद्धा और भव्यता के साथ सजाया गया है। मंदिर प्रबंधक अभिजात सिंह, उपाध्यक्ष , रामेश्वर पांडे कोषाध्यक्ष योगेंद्र सिंह अजय पांडे प्रशासनिक अधिकारीसहित अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों के सहयोग से धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, विश्वास, सेवा और समाज में सकारात्मकता का संदेश देने वाला अवसर भी है। मां के दरबार में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की आस्था का सम्मान करना मंदिर परिवार की प्राथमिकता है।अध्यक्ष रमेश यादव ने कहा कि मां पाटेश्वरी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था मंदिर की सबसे बड़ी पहचान है। नवरात्रि के दिनों में भक्त पूरे विश्वास के साथ मां के चरणों में अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करते हैं। मंदिर समिति का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन के दौरान सहज और भक्तिमय वातावरण मिले। उन्होंने भक्तों से पर्व को श्रद्धा, शांति और आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।प्रबंधक अभिजीत सिंह ने बताया कि मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर मां के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर के पदाधिकारी और सदस्य आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक अवसर लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ सेवा, सद्भाव और सामाजिक एकता की भावना को भी मजबूत करते हैं। मंदिर समिति की कोशिश है कि मां के दरबार में आने वाले भक्त श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर सकें।पौराणिक मान्यता से जुड़ा है मंदिर का इतिहास मंदिर में प्रदर्शित परिचय-पट्ट के अनुसार, पौराणिक मान्यता माता सती और भगवान शिव की कथा से जुड़ी है। मान्यता है कि राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने के बाद माता सती ने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे। माता सती के वियोग में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। धार्मिक आख्यान के अनुसार, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे और उन स्थानों पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मंदिर के परिचय-पट्ट में उल्लेख है कि इस स्थान पर माता सती की जांघ गिरने की मान्यता है, जिसके कारण यहां आदि शक्ति मां पाटेश्वरी देवी की उपासना की जाती है।परिचय-पट्ट में फैजाबाद के ऐतिहासिक गजेटियर का उल्लेख करते हुए मंदिर से संबंधित विवरण भी दिया गया है। इसमें मंदिर को चार एकड़ क्षेत्रफल में स्थित बताया गया है और इसके जीर्णोद्धार का श्रेय विक्रमुल महाजन को दिया गया है। ये विवरण मंदिर में अंकित ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित हैं।नवरात्रि के चौथे दिन मां के दरबार में उमड़ी श्रद्धा इस बात का एहसास कराती है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि जनआस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामुदायिक एकजुटता के भी महत्वपूर्ण आधार हैं। मां के चरणों में प्रार्थना करते श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, विश्वास और मंगलकामना का भाव प्रमुखता से दिखाई दिया।महत्वपूर्ण सूचना: माता सती से संबंधित कथा पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। मंदिर के इतिहास और प्राचीनता से जुड़े विवरण मंदिर परिसर में प्रदर्शित परिचय-पट्ट के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। मीडिया कर्मी इन धार्मिक मान्यताओं अथवा ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते और इनके संबंध में किसी प्रकार का दावा या दायित्व नहीं लेते।






