पांचवा आयाम (जसबीर/सच कीरत सिंह) अयोध्या:पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफा (स.अ.) एवं उनके छठे उत्तराधिकारी हज़रत इमाम जाफर-ए-सादिक़ (अ.स.) की विलादत की पूर्व संध्या पर मोती मस्जिद में जश्ने सादेक़ैन का आयोजन किया गया। कुरान की तिलावत, कलाम और तकरीर से सजी महफिल में अक़ीदत, इल्म और मोहब्बत-ए-रसूल का रूहानी माहौल नजर आया।महफिल का शुभारंभ मुहम्मद मिस्बाह ने तिलावत-ए-कुरान से किया। मिन्हाल आज़मी, ज़फीर अब्बास, निसार मेहंदी राजन, क़ानूनगो मुहम्मद हसनैन और सादिक़ असग़र ने अपने कलाम के माध्यम से मासूमीन की खिदमत में नजरान-ए-अक़ीदत पेश की। मोती मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद फरज़ान ने पैगंबर-ए-इस्लाम और हज़रत इमाम जाफर-ए-सादिक़ के इल्म, किरदार और शिक्षाओं पर रोशनी डालते हुए उनके जीवन को इंसानियत के लिए प्रेरणास्रोत बताया। महफिल का संचालन प्रो. (डॉ.) मिर्जा शहाब शाह ने किया।मिर्जा शहाब शाह ने कहा कि जश्ने सादेक़ैन केवल खुशी का अवसर नहीं, बल्कि इल्म और इंसानियत को समझने का संदेश है। पैगंबर-ए-इस्लाम ने पूरी इंसानियत को रहमत, अमन और भाईचारे का रास्ता दिखाया। इमाम जाफर-ए-सादिक़ की जिंदगी इल्म, तर्क और नैतिकता की मिसाल रही। उनकी शिक्षाएं आज के दौर में भी समाज को बेहतर दिशा देने की क्षमता रखती हैं। मोहब्बत और इंसाफ का पैगाम हर दौर में मानवता की सबसे बड़ी जरूरत है। हमें उनके बताए रास्ते को अपने आचरण में उतारकर समाज को रोशन करना चाहिए।






