डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही प्रतिक्रिया नहीं देती हैं। परिणामस्वरूप, अग्न्याशय (Pancreas) को सामान्य से अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है, और रक्त में शुगर (ग्लूकोज) का स्तर अनियंत्रित होने लगता है。यह स्थिति टाइप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes), हृदय रोग, और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का प्रमुख कारण बन सकती है ।कई बार लोग इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षणों को मामूली थकान या बढ़ता वजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है-पेट की चर्बी- वजन बढ़ना, खासकर पेट के निचले हिस्से के आसपास चर्बी का लगातार जमा होना इसका एक बड़ा संकेत है।
वजन घटाने में मुश्किल- लाख कोशिशों, डाइटिंग और एक्सरसाइज के बाद भी अगर आपका वजन कम नहीं हो रहा है, तो यह भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।
फैटी लिवर- लिवर में एक्स्ट्रा फैट का जमा होना।PCOS- महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस के कारण पीरियड्स का अनियमित होना और ओवरी में सिस्ट बनना।गर्दन और बगल का काला पड़ना- त्वचा पर, खासकर गर्दन के पीछे और बगल की त्वचा का काला और वेलवेटी होना।ब्रेन फॉग- किसी काम में ध्यान लगाने में कमी या भूलने की बीमारी महसूस होना।
लगातार भूख और मीठे की तलब- खाना खाने के तुरंत बाद भी कुछ मीठा खाने की तेज इच्छा होना और बार-बार भूख महसूस होना।
एनर्जी क्रैश- खाना खाने के बाद शरीर में अचानक सुस्ती आना या एनर्जी का स्तर अचानक कम होना।हाई ट्राइग्लिसराइड्स- ब्लड टेस्ट में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ आना।






