चंडीगढ़, तानिया रोहिल्ला। भारतीय जनता पार्टी हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में 100 दिन पूरे हो गए हैं। 28 मई 2026 को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने और 3 जून को पंचकूला स्थित पंचकमल कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद इन 100 दिनों में उन्होंने संगठन को केवल बैठकों और कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न वर्गों के बीच पहुंच बनाने पर विशेष जोर दिया। प्रदेश की दूसरी महिला भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के रूप में उनकी कार्यशैली में संगठनात्मक सक्रियता के साथ सामाजिक सरोकार, सेवा, धार्मिक-सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रभाव प्रमुख रूप से दिखाई दिया।डॉ. अर्चना गुप्ता ने प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले कार्यकर्ता संवाद को संगठन की प्राथमिकता बनाया। उनके आवास पर सुबह से शाम तक प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद हुआ। उन्होंने कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनीं, सुझाव लिए और संगठनात्मक विषयों पर खुलकर चर्चा की। जिलों के प्रवास को उन्होंने महज औपचारिकता न बनाकर कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचने और उनसे आत्मीय संबंध बनाने का माध्यम बनाया। इन 100 दिनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार प्रवास करते हुए उन्होंने करीब 25 हजार किलोमीटर की यात्रा की। सभी 27 संगठनात्मक जिलों में कार्यकर्ताओं के स्वागत, बैठकों और संवाद कार्यक्रमों ने संगठन में नई ऊर्जा का संचार किया। भीषण गर्मी के बावजूद पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल और पारंपरिक साधनों से कार्यकर्ताओं का स्वागत प्रदेशभर में संगठन के प्रति उत्साह और जुड़ाव का प्रतीक बना।संगठन और सरकार के समन्वय को बेहतर बनाते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ अर्चना गुप्ता ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जबरदस्त बांडिंग करते हुए कार्यकर्ताओं के माध्यम से लगातार जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र तक पहुंचाने और उन्हें लाभार्थी बनाने पर बल दिया। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए बूथ सक्रियता, मंडल बैठकों, शक्ति केंद्रों की सक्रियता और डिजिटल प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पन्ना प्रमुख से लेकर बूथ समिति, शक्ति केंद्र, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर तक प्रत्येक कार्यकर्ता को जिम्मेदारी के साथ जवाबदेही का भाव देने की दिशा में प्रयास हुए। इसी क्रम में ‘टिफिन बैठक—साथ बैठना, साथ बढ़ना’ की पहल ने संगठनात्मक संवाद को आत्मीयता से जोड़ा। 370 मंडलों के अंतर्गत शक्ति केंद्रों तक इस पहल के माध्यम से कार्यकर्ताओं के बीच सहज संवाद और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया गया।डॉ. गुप्ता की 100 दिनों की यात्रा केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही। सामाजिक संस्थाओं, सर्व समाज और विभिन्न समुदायों के कार्यक्रमों में सहभागिता के माध्यम से उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संपर्क बनाया। महिला शक्ति और युवा शक्ति से संवाद को भी प्राथमिकता दी गई, ताकि महिलाएं और युवा केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि संगठन और राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार5 बनें।राष्ट्रभाव को मजबूत करने के लिए तिरंगा यात्राओं, विभाजन विभीषिका स्मरण और कारगिल विजय जैसे कार्यक्रमों में संगठन की सक्रिय भागीदारी रही। वहीं पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, पल्स पोलियो और जरूरतमंदों की सहायता जैसे सेवा कार्यों के माध्यम से ‘सेवा ही संगठन’ की भावना को जनसरोकार से जोड़ा गया। इसी अवधि में समरसता संकल्प अभियान के माध्यम से संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के संदेश को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की पहल हुई। वाराणसी से आए पवित्र कलशों को प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों तक पहुंचाकर सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के सेवा-संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आगामी सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को भी संगठन के प्रत्येक स्तर तक पहुंचाया गया है। इस प्रकार डॉ. अर्चना गुप्ता के पहले 100 दिन संवाद, संगठन, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव के समन्वय की यात्रा के रूप में सामने आए हैं। अब यही ऊर्जा मिशन 2029 की दिशा में संगठन को बूथ से समाज तक और अधिक मजबूत करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।









