पंचकूला (तानिया रोहिल्ला) : राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), पंचकूला में हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया। डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में हिंदी पखवाड़े के तहत संस्थान के चिकित्सकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया। प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने कहा कि हिंदी हमारी समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जुड़ी भाषा है। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से दैनिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषा तभी सशक्त होती है, जब उसका प्रयोग व्यवहार और कार्यक्षेत्र में निरंतर बढ़े। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जैसे संस्थान की जिम्मेदारी है कि आयुर्वेद के ज्ञान और चिकित्सा पद्धति को सरल एवं सहज भाषा में समाज तक पहुंचाया जाए। प्रोफेसर प्रह्लाद रघु ने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। सरकारी संस्थानों में राजभाषा हिंदी का सहज और सरल प्रयोग आम लोगों तक सूचनाओं एवं सेवाओं की पहुंच को भी अधिक प्रभावी बनाता है। प्रशासनिक अधिकारी सतपाल ऐसवाल ने चिकित्सकों और कर्मचारियों से कार्यालयीन पत्राचार, टिप्पणियों तथा अन्य कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया गया। मंच का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महेश एम ने किया। इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. समित मसंद, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुराग कुशल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रितेश, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गरिमा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आकांक्षा राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मैत्री एचएस, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अश्वति पी, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अपर्णा दिलीप, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धवल जी मकवाना, असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रमोहन और लेखाकार दीपक राणा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।






