( तानिया रोहिल्ला) : पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आज कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब को अंधेरे में धकेलने का एक और शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जहां 12 से 18 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है और लोगों को अपने घरों में रोशनी के लिए मोमबत्तियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली संकट और गहरा गया है। किसान धान की फसल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उद्योगों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और गांवों में लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है। वडिंग ने कहा कि स्थिति गंभीर हो चुकी है। पंजाब की पीक बिजली मांग करीब 16,000 मेगावाट है, जबकि बिजली उत्पादन केवल करीब 4,000 मेगावाट है। इसके बावजूद राज्य बाहर से करीब 11,500 मेगावाट बिजली ले रहा है, लेकिन मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर गंभीर बिजली संकट पैदा कर रहा है। “जिन फसलों को बेटों की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया जाता है, वे सूख रही हैं और धान की फसल मुरझा रही है,” पीसीसी अध्यक्ष ने कहा। उन्होंने धान की फसल के महत्वपूर्ण सीजन में बिजली की कमी के कृषि पर पड़ रहे प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई पंप चलाने के लिए महंगे डीजल जनरेटरों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है, जबकि वे पहले ही बढ़ते कृषि खर्चों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने पंजाब के औद्योगिक क्षेत्र पर बिजली संकट के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उद्योगों को रात 8 बजे से बंद करने के लिए कहा जा रहा है, जबकि रिहायशी इलाकों में भी लगातार बिजली कटौती हो रही है। लंबे बिजली कटों के कारण घरों में इनवर्टर भी राहत देने में असमर्थ हो रहे हैं।वडिंग के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में स्थिति विशेष रूप से खराब है और गांवों में बार-बार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है, बिजली आपूर्ति में व्यवधान खड़ी धान की फसलों के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट की एक-एक यूनिट बंद है, जिससे राज्य की बिजली मांग पूरी करने की क्षमता और प्रभावित हुई है। वडिंग ने कहा कि राजपुरा थर्मल प्लांट में केवल करीब सात दिन का कोयला स्टॉक बचा है, जबकि तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में लगभग चार दिन का कोयला शेष है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार बिजली की मौसमी बढ़ती मांग के लिए पर्याप्त तैयारी करने में विफल रही है और कृषि, उद्योग तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।







