पंचकूला (दिव्या राणा): किसान खेतों में दिन-रात मेहनत करके धान उगाए और फिर अपनी ही फसल बेचने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हो, तो सरकार की खरीद व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने किसानों की इन परेशानियों को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि पोर्टल पर रिकॉर्ड नहीं मिलने, वेरिफिकेशन में देरी और प्रति एकड़ खरीद सीमा के कारण किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसान की पैदावार निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उसकी अतिरिक्त फसल कौन खरीदेगा? सरकार को किसानों को परेशानी में छोड़ने के बजाय उनकी पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।आरोप लगाते हुए कहा कि पोर्टल पर रिकॉर्ड संबंधी दिक्कतों और वेरिफिकेशन में देरी से किसानों का समय बर्बाद हो रहा है। खरीद प्रक्रिया की इन बाधाओं का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। वहीं, निर्धारित सीमा से अधिक धान पैदा होने पर अतिरिक्त उपज की बिक्री को लेकर भी किसानों में चिंता बनी हुई है।पूर्व विधायक ने मांग की कि पोर्टल की खामियां दूर कर लंबित वेरिफिकेशन जल्द पूरा किया जाए और किसानों की वास्तविक पैदावार के अनुसार अतिरिक्त धान खरीदने की व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिले और खरीदी गई फसल का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में समय पर किया जाए।






