महिलाओं को सहारे की नहीं, अपने पैरों पर खड़े होने के हुनर की जरूरत : सलमा फ्रांसिस

नई दिल्ली,तानिया रोहिल्ला महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने के बजाय उन्हें हुनर, रोजगार और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में Vision for Oasis Waves Society (VOWS) लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में VOWS की महत्वपूर्ण पहल ‘महिरी’ ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। दिल्ली के द्वारका में महिरी का अपना आउटलेट शुरू किया गया है, जो वंचित एवं जरूरतमंद महिलाओं के कौशल विकास और आजीविका निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।महिरी महज एक एथनिक वियर ब्रांड नहीं, बल्कि महिलाओं के हुनर, मेहनत, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की पहचान है। VOWS के कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत महिलाओं को सिलाई, डिजाइनिंग और परिधान निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। अब उनके द्वारा तैयार किए गए परिधानों को बाजार से जोड़कर उनके हुनर को आय के स्थायी साधन में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।महिला को सहारा नहीं, अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर चाहिए”VOWS की संस्थापक अध्यक्ष एवं संचालिका सलमा फ्रांसिस ने कहा कि संस्था का उद्देश्य महिलाओं को केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा कौशल और मंच देना है, जिससे वे स्वयं कमाई कर सकें और आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।उन्होंने कहा, “हमारा प्रयास है कि महिलाओं को ऐसा हुनर और ऐसा मंच मिले, जिसके माध्यम से वे स्वयं कमाएं, आर्थिक रूप से मजबूत बनें और आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़ी हों। जब एक महिला आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती है, तो वह अपने जीवन से जुड़े फैसले अधिक मजबूती से ले सकती है और अपने परिवार के भविष्य को भी बेहतर बना सकती है।”सलमा फ्रांसिस ने कहा कि महिरी VOWS के लिए केवल एक ब्रांड या आउटलेट नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, सामाजिक प्रतिबद्धता और महिलाओं के प्रति संस्था की सोच का परिणाम है। यह पहल इस बात को दर्शाती है कि यदि जरूरतमंद महिलाओं को प्रशिक्षण, अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने जीवन में स्थायी बदलाव ला सकती हैं।हुनर को बाजार से जोड़ने की पहलVOWS लंबे समय से वंचित महिलाओं को कौशल विकास और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहा है। महिरी इसी प्रयास को एक सतत आजीविका मॉडल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।सलमा फ्रांसिस ने कहा किमहिरी से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से परिधान तैयार कर रही हैं और अपने हुनर को आय के अवसर में बदल रही हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास, आर्थिक स्वतंत्रता और अपने भविष्य को स्वयं आकार देने की क्षमता विकसित हो रही है।संस्था का कहना है कि हर सिलाई उनके हुनर की पहचान और हर तैयार परिधान आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है।पूरी टीम की मेहनत से साकार हुआ सपना महिरी की इस उपलब्धि के पीछे VOWS की पूरी टीम की निरंतर मेहनत, समर्पण और टीमवर्क रहा है। कल्याणी और अमिंदर प्रीत ने भी इस पहल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनके प्रयासों से महिलाओं के हुनर को पहचान दिलाने और उसे बाजार से जोड़ने के अभियान को मजबूती मिली।संस्था के अनुसार यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि VOWS की पूरी टीम और उन सभी महिलाओं की सामूहिक सफलता है, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने हुनर पर विश्वास किया और आत्मनिर्भरता की राह चुनी।ONGC CSR का महत्वपूर्ण सहयोग इस पहल को मजबूत बनाने में ONGC के CSR सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। CSR के माध्यम से मिले सहयोग ने VOWS को जरूरतमंद महिलाओं तक कौशल विकास और आजीविका से जुड़े अवसर पहुंचाने में सहायता प्रदान की।VOWS का मानना है कि CSR केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन में साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। ONGC के सहयोग से महिलाओं को प्रशिक्षण, कौशल और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को बल मिला है।एक महिला की आत्मनिर्भरता, पूरे परिवार की मजबूती उन्होंने कहा किसंस्था का मानना है कि जब महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहतर अवसर तैयार होते हैं।महिरी एक उच्च कोटि की सकारात्मक सोच और बदलाव की एक जीवंत मिसाल है—जहां हर धागे में एक कहानी है और हर कहानी में आत्मनिर्भरता का सपना है

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