योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और शरीर को जोड़ने वाला आध्यात्मिक माध्यम : कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा

चण्डीगढ़, 9 जून — हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि शरीर मन और आत्मा को जोड़ने का एक माध्यम है। योग शब्द का वास्तविक अर्थ ही जोड़ना है। योग के नियमित अभ्यास से शरीर में उर्जा का संचार होता है, मन शांत रहता है तथा एकाग्रता बढती है।

कृषि मंत्री आज जींद में सीआरएसयू के महर्षि योग पतंजलि सभागार में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि अपना संबोधन दे रहे थे।

श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मनुष्य को प्रत्येक कार्य करने से पहले अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए। जब व्यक्ति अपनी आत्मा के अनुरूप कार्य करता है तो वह सही मार्ग पर चलता है। ज्ञान बाहर से प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन उसे जीवन में उतारने और आत्मसात करने का कार्य भीतर से होता है। उन्होंने कहा कि हमारे संत, ऋषि-मुनियों और महापुरुषों ने सदैव मानवता को आत्मज्ञान, सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया है। उनके द्वारा दिए गए उपदेश और जीवन मूल्य आज भी समाज को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने अपने तप, त्याग और साधना के माध्यम से यह संदेश दिया कि आत्मज्ञान ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। महापुरुषों की शिक्षाएं हमें प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और सेवा की भावना अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। उनके आदर्शों पर चलकर व्यक्ति न केवल अपने जीवन को सफल बना सकता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कृषि मंत्री ने कहा कि भारत ने पूरी दुनिया को योग का संदेश दिया है और यही हमारी महान सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। आज विश्वभर में योग की महत्ता को स्वीकार किया जा चुका है। योग के माध्यम से व्यक्ति आत्मिक शांति प्राप्त करता है तथा उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और अनेक प्रकार की बीमारियों से बचाव संभव होता है। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से पूरी दुनिया योग की शक्ति को स्वीकार कर रही है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा भी योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप योग एक वैश्विक आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ, जागरूक, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनेगा। योग व्यक्ति को आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देता है। जब व्यक्ति मजबूत होगा, तभी समाज और राष्ट्र भी मजबूत बनेंगे। उन्होंने कहा कि यदि भारत के 140 करोड़ नागरिक स्वस्थ, जागरूक और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लें तो विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। इस दिशा में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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