वनअसिस्ट–हंसा रिसर्च का अध्ययन: भारत में स्मार्टफोन की सुरक्षा को लेकर बढ़ता संकट

पांचवा आयाम (राकेश मिश्रा):चंडीगढ़, भारत की प्रमुख बीमा-प्रौद्योगिकी कंपनी वनअसिस्ट ने आज अपने नए उपभोक्ता अंतर्दृष्टि अध्ययन “द ग्रेट इंडियन स्मार्टफोन प्रोटेक्शन क्राइसिस” के नतीजे जारी किए। यह अध्ययन वनअसिस्ट ने वैश्विक बाजार अनुसंधान संस्था हंसा रिसर्च के साथ मिलकर किया है। इस रिपोर्ट में पूरे भारत में स्मार्टफोन के इस्तेमाल, फोन को होने वाले आकस्मिक नुकसान और फोन की सुरक्षा के लिए लिए जाने वाले सुरक्षा कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई है।सुब्रत पाणि, वनअसिस्ट के को-फाउंडर, ने कहा, “यह शोध उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक दिलचस्प विरोधाभास को दर्शाता है। स्मार्टफोन लोगों के संवाद करने, लेन-देन करने, काम करने और मनोरंजन का साधन बने रहने के साथ-साथ उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। वहीं, फोन का गलती से क्षतिग्रस्त होना भी एक आम अनुभव है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में उपभोक्ता बिना किसी सुरक्षा के अपने डिवाइस का इस्तेमाल करते रहते हैं और उन्हें फोन के खराब होने या टूटने की लगातार चिंता बनी रहती है। जैसे-जैसे डिवाइस अधिक महंगे होते जा रहे हैं और उनके इस्तेमाल की अवधि बढ़ रही है, उपभोक्ता अपने पूरे डिवाइस स्वामित्व के दौरान अधिक भरोसा और मानसिक शांति चाहते हैं। ऐसे में उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह किफायती, सरल और भरोसेमंद सुरक्षा समाधानों के जरिए उपभोक्ताओं की चिंताओं को बेहतर ढंग से दूर करे।”द ग्रेट इंडियन स्मार्टफोन प्रोटेक्शन क्राइसिस से सामने आए निष्कर्ष भारत के उपभोक्ता प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर सामने आए हैं। भारत में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, डिवाइस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और स्मार्टफोन के इस्तेमाल की अवधि तीन साल से भी अधिक हो रही है। ऐसे में डिवाइस की कीमत और उसके लिए सुरक्षा अपनाने के बीच बढ़ता अंतर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पहले से कहीं अधिक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया । रिपोर्ट में स्मार्टफोन ब्रांड्स, रिटेलर्स, बीमा कंपनियों और प्रोटेक्शन सर्विस प्रदाताओं से मिलकर किफायती सुरक्षा, क्लेम प्रक्रिया की जटिलता और उपभोक्ताओं के भरोसे जैसी चुनौतियों का समाधान करने की अपील की गई है। साथ ही, सुरक्षा को केवल बिक्री के समय पेश किए जाने वाले एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि स्मार्टफोन के पूरे स्वामित्व अनुभव का अभिन्न हिस्सा मानने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

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