अलीगढ़। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पंकज कुमार अग्रवाल के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव साक्षी गर्ग के तत्वावधान में सोमवार को विधि विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जिला कारागार का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को न्याय व्यवस्था, कारागार प्रशासन, बंदियों के अधिकारों तथा सुधारात्मक गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
भ्रमण के दौरान जिला कारागार प्रशासन द्वारा छात्रों को कारागार की कार्यप्रणाली से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यार्थियों को कारागार के इतिहास, उद्देश्य तथा वर्तमान समय में जेलों की बदलती भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
कारागार अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि आधुनिक कारागार केवल दंड देने का केंद्र नहीं है, बल्कि बंदियों के सुधार, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
विद्यार्थियों ने कारागार परिसर के विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया, जिनमें प्रवेश व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, बैरकें, चिकित्सालय, रसोईघर, पुस्तकालय, मुलाकात कक्ष, प्रशिक्षण केंद्र एवं अन्य व्यवस्थाएं शामिल रहीं। इसके साथ ही उन्हें विधिक सहायता प्रणाली की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियमित रूप से कार्य किया जाता है।
इस अवसर पर छात्रों को न्यायिक प्रक्रिया, विचाराधीन एवं सजायाफ्ता बंदियों के बीच अंतर, जेल नियमावली, मानवाधिकारों की सुरक्षा तथा सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की अवधारणा के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कारागार प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न नवाचारों एवं व्यवस्थाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। छात्रों ने विशेष रूप से बंदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में रुचि दिखाई तथा उनके सामाजिक महत्व को समझा। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों की विधि शिक्षा को व्यवहारिक अनुभवों से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।







