स्वाभिमान की मिसाल: 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान ने मेहनत के दम पर ठुकराई बुढ़ापा पेंशन

पंचकूला (दिव्या राणा ): बुढ़ापा पेंशन पाना हर बुजुर्ग का कानूनी हक है। संकट के दिनों में यह एक बड़ा सहारा बनती है। इसे लेना कोई जुल्म या अपराध नहीं है। इसके बावजूद गांव बतौड़ के एक 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान नरपत सिंह राणा ने समाज के सामने ईमानदारी और स्वाभिमान की एक अनूठी मिसाल पेश की है। इस उम्र में भी उन्होंने अपनी मेहनत पर अटूट विश्वास बनाए रखा। उन्होंने आज तक सरकार द्वारा दी जाने वाली बुढ़ापा पेंशन का लाभ नहीं लिया। उनका मानना है कि जब तक शरीर काम कर रहा है तब तक अपनी मेहनत की कमाई से ही जीवन यापन करना चाहिए। बुजुर्ग नरपत सिंह राणा का यह कदम आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि उम्र चाहे जो भी हो आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान से बड़ा कोई धन नहीं है। उनके इस फैसले की पूरे क्षेत्र और समाज में जमकर सराहना होती रहती है। पूर्व सरपंच व समाजसेवी लक्ष्मण बतौड ने कहा कि बुढ़ापा पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं असल में उन असहाय या जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए हैं जिनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं होता। खुद सक्षम होने के कारण इस बुजुर्ग ने पेंशन न लेकर किसी और जरूरतमंद व्यक्ति का हक सुरक्षित किया है। आज के दौर में जहां पूरी तरह सक्षम व्यक्ति भी थोड़े से पैसों के लिए हर छोटी बड़ी सरकारी मदद के पीछे भागते हैं वहां इस बुजुर्ग का यह कदम समाज को लालच से दूर रहने और अपनी क्षमता पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है।

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