चंडीगढ़, (तानिया रोहिल्ला) : हरियाणा महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्षा एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री सुधा भारद्वाज ने निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—द्वारा आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम-से-कम 14 बार रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज कराना निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई मौकों पर महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों की जानकारी समय पर नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई। ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूचियों से नाम हटाने और बहाल करने, SIR तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन और पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गईं।फॉर्म-6 में बदलाव पर भी सवाल सुधा भारद्वाज ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, विवेक जोशी ने कहा था कि वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन होना चाहिए, जबकि बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव को अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहली बार मतदान करने वाले युवाओं सहित सभी पात्र नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर चिंता उन्होंने कहा कि मतदाता डेटा और चुनावी रोल से जुड़े डिजिटल सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंताएं सामने आई हैं। मतदाता सूची लोकतांत्रिक अधिकारों का आधार है, इसलिए उसकी शुचिता, डेटा की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सुधा भारद्वाज ने कहा कि निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयोग की ओर से यह कहा गया है कि SIR सहित सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और मतभेदों के दावों से असहमति जताई गई है। ऐसे में पूरे मामले के रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से लेकर SIR जैसी प्रक्रिया तक हर कदम कानून, पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के अनुरूप होना चाहिए। इसी के विरोध में चुनाव आयुक्त के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।






