पंचकूला, (तानिया रोहिल्ला) : पंचकूला शहर हरियाणा के प्रमुख शहरों में से एक है। लेकिन शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक और लगातार सामने आ रहे डॉग बाइट के मामलों ने आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पंचकूला की लगभग हर गली और मोहल्ले में आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। राहगीरों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति लगातार खतरा बनती जा रही है। डॉग बाइट की घटनाओं में कई बुजुर्ग घायल हो चुके हैं, जबकि बच्चों को लेकर अभिभावकों में भी भय का माहौल बना हुआ है। सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्गों तथा स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्षा सुधा भारद्वाज ने कहा कि यह समस्या केवल पंचकूला तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे हरियाणा में आए दिन डॉग बाइट की घटनाएं सामने आ रही हैं। कहीं बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आती हैं तो कहीं छोटे बच्चे इनका शिकार बन रहे हैं। ऐसी घटनाएं नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय हैं और इनके स्थायी समाधान के लिए प्रशासन को ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। सुधा भारद्वाज ने कहा कि शहरवासियों की सुरक्षा किसी भी प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होनी चाहिए। आवारा कुत्तों की समस्या अब केवल असुविधा का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के लिए अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आती रहती है, लेकिन यदि इन अभियानों का प्रभाव धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है, तो प्रशासन को अपनी पूरी व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। केवल कागजों पर योजनाएं बनाने या अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। सुधा भारद्वाज ने प्रशासन से मांग की कि पंचकूला में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए समयबद्ध, वैज्ञानिक और प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। नसबंदी अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ उसकी नियमित निगरानी की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित लक्ष्य वास्तव में धरातल पर पूरे हों। उन्होंने कहा कि डॉग बाइट की घटनाओं वाले संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, नगर निगम और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए व्यापक व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचकूला के बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए इस समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। सुधा भारद्वाज ने कहा कि नागरिकों की मूलभूत सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी उतनी ही गंभीरता और संवेदनशीलता से किया जाना आवश्यक है। प्रशासन को केवल अस्थायी कार्रवाई के बजाय ऐसा स्थायी तंत्र विकसित करना चाहिए, जिससे शहरवासियों को आवारा कुत्तों और अन्य आवारा पशुओं के आतंक से वास्तविक राहत मिल सके।






