देश की युवा पीढ़ी को आज़ादी का महत्व बताना जरूरी – अजय मित्तल

पंचकूला(दिव्या राणा):भाजपा मुख्यालय पंचकमल के अटल सभागार में ‘विभाजन की विभीषिका – स्मृति दिवस’ पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 1947 में देश के विभाजन के पश्चात पलायन कर हिंदुस्तान आने वाले उस दौर के शरणार्थियों एवं उनके परिवारजनों को विशेष तौर पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि रहे डिप्टी स्पीकर डॉ कृष्ण मिड्ढा एवं मुख्यवक्ता रहे विधायक घनश्याम दास अरोड़ा। जिला अध्यक्ष अजय मित्तल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में नगर महापौर श्यामलाल बंसल, चेयरमैन ओमप्रकाश देवीनगर, चेयरमैन जसमेर सिंह बंजारा, नगर परिषद चेयरमैन कृष्ण लाम्बा, संगोष्ठी की संयोजक रंजीता मेहता, सहसंयोजक भारत हितैषी, पूर्व जिला अध्यक्ष विशाल सेठ, ज़िला महामंत्री भवनजीत सिंह सहित तमाम जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं आम नागरिक भारी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम के मुख्यअतिथि डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिढ्ढा ने विभाजन के दौर की पीड़ा को बड़े ही मार्मिक अंदाज़ में रखते हुए कहा कि पलायन के समय घटी वीभत्स घटनाओं के बारे में सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है। उन्होंने कहा कि आजादी के जश्न के बीच ना जाने देश के विभाजन की घटिया सोंच कहा से आ गई। अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना सबकुछ गंवा कर हिन्दुस्तान आने वाले करोड़ो लोगो को नमन है। उन्होंने कहा कि उस दौर के दो राजनीतिक व्यक्तियों के प्रधानमंत्री बनने की ललक ने देश का बंटवारा करवा दिया। पलायन कर हिन्दुस्तान आये शरणार्थियों ने रेहड़ी, रिक्शा, फेरी चलाकर गुजारा किया, स्वाभिमान के साथ कड़ी मेहनत की और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उच्च स्थान हासिल किया। डिप्टी स्पीकर ने दिल्ली के जंतरमंतर के हालिया धरने का ज़िक्र करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी का कैमरे के सामने अभद्र भाषा का प्रयोग करना बेहद दुखद है। ऐसे युवाओं को देश का इतिहास बताकर कर मुख्यधारा में लाना हम सबकी जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के मुख्यवक्ता विधायक घनश्याम दास अरोडा ने कहा कि हमने बंटवारे का दर्द महज पंजाब का ही नहीं बल्कि बंगाल का भी सहा है। उन्होंने कहा, इतिहासकारों के अनुसार लगभग दो करोड़ लोगों ने बैलगाड़ी, रेलगाड़ी, जलमार्ग और पदयात्रा कर, भोजन पानी दवा के अभाव को झेलते हुए शरणार्थी बन कर आये और पुरुषार्थी बन कर स्वयं को पुनर्स्थापित किया। घनश्याम दास ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभाजन की पीड़ा को गहराई से महसूस किया और हर वर्ष विभाजन की विभीषिका – स्मृति दिवस मनाने का निर्णय लिया।अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में जिला अध्यक्ष अजय मित्तल ने कहा, ये केवल देश का विभाजन नहीं था बल्कि हमारी साझी संस्कृति और विरासत का भी विभाजन था। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हमें देश की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए एकजुटता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा, कार्यक्रम का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को आज़ादी के महत्व को बताना है।कार्यक्रम की संयोजिका रंजीता मेहता ने मंच का संचालन किया एवं सह संयोजक भारत हितेषी ने मंच की व्यवस्था में अपना योगदान दिया।

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