ईडी के सबूत साझा करने तक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एफआईआर नहीं: अमन अरोड़ा

चंडीगढ़ (तानिया रोहिल्ला): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पंजाब पुलिस को ‘कैश फॉर ट्रांसफर और लैंड फ्रॉड’ मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर एफआईआर दर्ज करने के लिए भेजे गए पत्रों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने बुधवार को कहा कि जब तक ईडी पंजाब पुलिस के साथ पुख्ता और स्पष्ट सबूत साझा नहीं करता, तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।31 अगस्त को ईडी की ओर से पंजाब पुलिस को भेजे गए तीसरे पत्र के संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए अरोड़ा ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला केंद्र की भाजपा सरकार की ओर से शुरू किया गया राजनीतिक बदनाम करने का अभियान है। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।अरोड़ा ने कहा कि ईडी द्वारा भेजी गई जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी ईडी उनका नाम ले रही है, कभी कैबिनेट सहयोगी लाल चंद कटारूचक का और संजीव अरोड़ा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन उनके अनुसार इन मामलों में ठोस आधार सामने नहीं आया है।ईडी ने पंजाब सरकार के 28 अगस्त के पत्र के जवाब में भेजे गए पत्र में पहले साझा की गई मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी जानकारी के आधार पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। एजेंसी ने कहा है कि उसके पहले पत्र को भेजे हुए 30 दिन बीत चुके हैं और देरी से सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका पैदा हो सकती है।ईडी ने पंजाब पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने से पहले अतिरिक्त प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मांगे जाने के अनुरोध को भी खारिज कर दिया है।ईडी और पंजाब पुलिस के बीच चल रहा पत्राचार इस साल मई की शुरुआत में निखिल गोहल से जुड़े परिसरों पर हुई ईडी की तलाशी के बाद सामने आया। ईडी का दावा है कि इस कार्रवाई के दौरान कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर और लैंड फ्रॉड’ नेटवर्क से जुड़े अहम तथ्य सामने आए।अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है कि ईडी द्वारा स्पष्ट और पढ़ने योग्य सबूत उपलब्ध कराने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पुलिस को भेजे गए दस्तावेजों की प्रतियां और स्नैपशॉट स्पष्ट नहीं हैं।अरोड़ा ने अपने खिलाफ ईडी की जांच को लेकर कहा कि एजेंसी ने उनके मित्र गौरव धीर को निशाना बनाकर उन तक पहुंचने की कोशिश की। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि धीर के अल्टस प्रोजेक्ट से संबंधित छह सीएलयू वर्ष 2011 से 2022 के बीच मंजूर किए गए थे, जब राज्य में शिअद-भाजपा और कांग्रेस की सरकारें थीं।उन्होंने दावा किया कि प्रोजेक्ट के लेआउट प्लान में भी दो बदलाव पिछली सरकारों के कार्यकाल में और तीन बदलाव आप सरकार के दौरान हुए। अरोड़ा के अनुसार, ये बदलाव कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जा सकते हैं।उन्होंने ईडी के उस आरोप को भी निराधार बताया, जिसमें कथित तौर पर डेवलपर द्वारा जमीन गमाडा को वापस बेचने को गौरव धीर को लाभ पहुंचाने से जोड़ा गया है। अरोड़ा ने कहा कि इस मामले का आधार बनी दो एफआईआर को अदालत पहले ही रद्द कर चुकी है।फिलहाल ईडी और पंजाब पुलिस के बीच इस मामले को लेकर पत्राचार जारी है और एफआईआर दर्ज करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

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