नेत्रदान से रोशन हो सकती हैं दो जिंदगियां, लोगों से आगे आने की अपील

चंडीगढ़ : (राजकुमार) राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के समापन अवसर पर डॉ. अशोक शर्मा कॉर्निया सेंटर की ओर से सिटी आई बैंक, चंडीगढ़ के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कॉर्निया की आवश्यकता वाले मरीजों और नेत्रदान करने वाले लोगों के बीच की दूरी को कम करना तथा समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में सिटी आई बैंक के अध्यक्ष दिनेश कुमार डोगरा ने लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने और इस नेक कार्य के लिए आगे आने की अपील की। पंजाब के पूर्व डीएचएस डॉ. राकेश गुप्ता ने कॉर्नियल अंधता की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि अधिक संख्या में नेत्रदान होने से हजारों लोगों की दृष्टि बहाल की जा सकती है।सिटी आई बैंक के सचिव एवं डॉ. अशोक शर्मा कॉर्निया सेंटर के निदेशक डॉ. अशोक शर्मा ने नेत्रदान से जुड़े विभिन्न मिथकों को दूर करते हुए कहा कि कॉर्नियल अंधता से पीड़ित लोगों के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि का उपहार मिल सकता है।डॉ. शर्मा ने कहा कि किसी भी उम्र के व्यक्ति, चश्मा पहनने वाले तथा उच्च रक्तचाप या मधुमेह से पीड़ित लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं। उन्होंने समाज के स्वयंसेवकों से नेत्रदान के संदेश को घर-घर पहुंचाने तथा जरूरत पड़ने पर शोक संतप्त परिवारों को परामर्श देकर नेत्रदान के लिए प्रेरित करने की अपील की।उन्होंने बताया कि देश में हर साल करीब 1.50 लाख से 2.70 लाख गुणवत्तापूर्ण दाता आंखों की आवश्यकता होती है, जबकि वर्तमान में लगभग 68 हजार आंखें ही दान के माध्यम से प्राप्त हो पा रही हैं। उन्होंने परिवारों से अपने प्रियजनों की अंगदान संबंधी इच्छा का सम्मान करने की अपील की। साथ ही बताया कि मृत्यु के बाद कॉर्नियल ऊतक को सुरक्षित रखने के लिए नेत्रदान की प्रक्रिया छह घंटे के भीतर पूरी करना आवश्यक होता है।सोसाइटी के उपाध्यक्ष डॉ. राजन शर्मा ने नेत्रदान से जुड़े भ्रम दूर करते हुए बताया कि नेत्रदान के बाद मृतक के चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती। शव को अस्पताल ले जाने की आवश्यकता भी नहीं होती, बल्कि अस्पताल की टीम मृतक के घर पहुंचकर प्रक्रिया पूरी करती है। उन्होंने बताया कि टीम सामान्यतः 15 से 20 मिनट में पहुंच सकती है और नेत्रदान की प्रक्रिया में लगभग 10 से 15 मिनट लगते हैं, जिससे अंतिम संस्कार की तैयारियों में कोई महत्वपूर्ण देरी नहीं होती।चार दशक से कॉर्निया प्रत्यारोपण के क्षेत्र में योगदानडॉ. अशोक शर्मा नेत्र रोग विभाग के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर और अग्रणी कॉर्नियल प्रत्यारोपण सर्जन हैं। उन्होंने एलवीपीईआई, हैदराबाद तथा आई कंसल्टेंट्स ऑफ मैरीलैंड, अमेरिका से कॉर्निया फेलोशिप प्राप्त की है। उन्हें कॉर्नियल प्रत्यारोपण का करीब चार दशकों का अनुभव है। वह सिवनी रहित कॉर्नियल प्रत्यारोपण सहित जटिल कॉर्नियल सर्जरी करते हैं। बच्चों और विशेषकर शिशुओं में कॉर्नियल प्रत्यारोपण उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है।बच्चों में कॉर्नियल प्रत्यारोपण पर उनके कार्य के लिए उन्हें बेस्ट पोस्टर अवार्ड तथा उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए कॉर्निया हीरो अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। नेत्रदान और कॉर्नियल प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें राज्य पुरस्कार भी प्रदान किया गया है।

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