शहर की डॉ. साज़ीना खान को ऑक्सफोर्ड के वर्ल्ड स्कूल समिट 2026 में प्रतिष्ठित पैनलिस्ट के रूप में किया गया आमंत्रित

चंडीगढ़, (राकेश मिश्रा):चंडीगढ़की प्रसिद्ध शिक्षाविद्, लेखिका और कवयित्री डॉ. साज़ीना खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित सईद बिजनेस स्कूल में आयोजित वर्ल्ड स्कूल समिट 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस सम्मेलन में दुनिया भर के शिक्षा विशेषज्ञों ने 21वीं सदी के लिए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था तैयार करने पर विचार-विमर्श किया।डॉ. खान ने “रेफ्रेमिंग एजुकेशन फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विशेषज्ञ आकाशी शाह, जी उमर फारूक और सिल्विया सुसाना गोंज़ालेज के साथ भाग लिया। इस चर्चा का संचालन मानवी खिलनानी ने किया। इसमें दुनिया के कई शिक्षा विशेषज्ञों ने तेजी से बदलती और तकनीक आधारित दुनिया में छात्रों को तैयार करने में स्कूलों, यूनिवर्सिटीज और शिक्षकों की बदलती भूमिका पर अपने विचार साझा किए।अपने संबोधन में डॉ. साज़ीना ने कहा कि शिक्षा को केवल रटने और अधिक पाठ्य सामग्री पढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय ऐसी शिक्षा होनी चाहिए जो छात्रों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, सहयोग की भावना, नैतिक सोच और जीवनभर सीखने की क्षमता विकसित करे। उन्होंने कहा कि ज्ञान जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि छात्र उसका सही और जिम्मेदारी से वास्तविक जीवन में उपयोग करना सीखें।उन्होंने कोर्स में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अलग-अलग कक्षाओं और विषयों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए, ताकि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जो केवल याद करने की क्षमता नहीं, बल्कि रचनात्मकता, संवाद कौशल, समस्या समाधान और व्यवहारिक समझ का भी मूल्यांकन करे।एआई के प्रभाव पर बात करते हुए डॉ. साज़ीना ने कहा कि भविष्य की शिक्षा में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का संतुलन भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण पर भी बल दिया और कहा कि आज के शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि छात्रों में जिज्ञासा जगाने और बेहतर सीखने का माहौल तैयार करने वाले मार्गदर्शक हैं।ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में बोलने के निमंत्रण पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए डॉ.साज़ीना खान ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी समावेशी, प्रभावी और वैश्विक स्तर पर उपयोगी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करती रहेंगी, जो छात्रों को ज्ञान, उद्देश्य और संवेदनशीलता के साथ भविष्य का निर्माण करने में सक्षम बनाए।

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