सीमाएं खिंचीं, घर उजड़े, रिश्ते बिछड़े; विभाजन की पीड़ा के आगे अयोध्या पुलिस ने झुकाया सिर

पांचवा आयाम ( जसबीर/ सच कीरत सिंह) अयोध्या:इतिहास में कुछ तारीखें केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं, वे अपने भीतर लाखों लोगों का दर्द, बिछड़ने की पीड़ा और अपनों को खोने की स्मृतियां समेटे रहती हैं। वर्ष 1947 का विभाजन भी ऐसी ही त्रासदी थी। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर के नेतृत्व में अयोध्या पुलिस ने इस दर्दनाक अध्याय को स्मरण करते हुए विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।रिजर्व पुलिस लाइन स्थित पुलिस कार्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन धारण कर विभाजन के दौरान विस्थापन, पीड़ा और जनहानि का दंश झेलने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।वर्ष 1947 में खिंची विभाजन की रेखा ने केवल भूगोल नहीं बदला, बल्कि लाखों जिंदगियों की दिशा बदल दी। असंख्य लोगों को अपने घर, खेत-खलिहान, कारोबार और पुश्तैनी जमीन छोड़कर अनजान रास्तों पर निकलना पड़ा। जिन गलियों में पीढ़ियां पली-बढ़ी थीं, उन्हें पीछे छोड़कर लोगों को नए ठिकानों की तलाश करनी पड़ी।विस्थापन की यह यात्रा बेहद कठिन और पीड़ादायक थी। हिंसा और भय के वातावरण में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित लाखों लोगों को असुरक्षा का सामना करना पड़ा। अनेक परिवार रास्ते में बिछड़ गए। किसी ने माता-पिता खोए, किसी ने संतान, तो किसी ने जीवनभर के साथी को। बहुत से लोग अपने प्रियजनों की तलाश में वर्षों तक भटकते रहे।
विभाजन की त्रासदी का दर्द केवल तत्कालीन पीढ़ी तक सीमित नहीं रहा। विस्थापित परिवारों ने नए स्थानों पर अपने जीवन को फिर से खड़ा किया, लेकिन पीछे छूटे घर, बिछड़े रिश्ते और अपनों की यादें उनके साथ चलती रहीं। कई परिवारों की अगली पीढ़ियों तक उस दौर की पीड़ा और संघर्ष की कहानियां पहुंचीं।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि विभाजन में प्राण गंवाने वाले लोगों की स्मृति को नमन करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इतिहास के इस अध्याय को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत की पीड़ा को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाना है।उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका यह संदेश देती है कि नफरत और हिंसा का परिणाम हमेशा मानवता के लिए विनाशकारी होता है। समाज की वास्तविक शक्ति शांति, आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव में निहित है। आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से यह सीख लेनी चाहिए कि किसी भी मतभेद का समाधान हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और मानवीय संवेदना है।
कार्यक्रम के दौरान अयोध्या पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर विभाजन की त्रासदी में प्राण गंवाने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों को श्रद्धांजलि दी। वातावरण में गंभीरता और संवेदना के बीच उन परिवारों को भी स्मरण किया गया, जिन्होंने विस्थापन और अपनों के बिछड़ने की असहनीय पीड़ा झेली।मौन के वे दो मिनट केवल श्रद्धांजलि नहीं थे, बल्कि इतिहास के दर्द को याद करते हुए भविष्य के लिए एक संकल्प भी थे—मानवता, शांति, भाईचारे और एकता को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

⚡ SHARE THIS POST
  • Related Posts

    साइबर ठगी के 2.27 लाख रुपये लौटाए, चार पीड़ितों को राहत—अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण

    पांचवा आयाम ( जसबीर/ सच कीरत सिंह) अयोध्या:साइबर ठगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए अयोध्या साइबर क्राइम थाना पुलिस ने चार शिकायतों में फंसी 2,27,251 रुपये की धनराशि…

    भाजपा नेता नरेश अरोड़ा ने करवाया समस्याओं का समाधान

    पांचवा आयाम (राकेश मिश्रा):चंडीगढ़। सेक्टर-20 मार्केट एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित पुलिस-पब्लिक बैठक में मार्केट के दुकानदारों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।बैठक में डीएसपी…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *