पंचकूला : क्षेत्र में देर रात जेसीबी मशीन से कथित तौर पर खुदाई किए जाने का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में रात के समय जेसीबी मशीन से जमीन की खुदाई होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह खुदाई किस उद्देश्य से की जा रही थी और क्या इसके लिए संबंधित विभाग से नियमानुसार अनुमति ली गई थी? फिलहाल वीडियो के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौके पर की जा रही गतिविधि अवैध खनन थी। माइनिंग विभाग और प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खुदाई वैध अनुमति के तहत हो रही थी या नियमों का उल्लंघन किया गया। पंचकूला में पहले भी सामने आते रहे हैं माइनिंग के मामले पंचकूला प्रशासन और पुलिस पहले भी अवैध खनन के मामलों में कार्रवाई करती रही है। जुलाई 2026 में घग्गर नदी के पास अवैध खनन रोकने पहुंची पुलिस और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम पर हमले के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार मामले में ट्रैक्टर-ट्रॉली और खनन से संबंधित उपकरण भी जब्त किए गए थे। वहीं, प्रशासन ने जुलाई में मानसून अवधि के दौरान जिले में खनन गतिविधियों पर रोक लगाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी, अतिरिक्त नाके और नियमित औचक निरीक्षण के निर्देश दिए थे। उस समय प्रशासन के अनुसार अप्रैल 2026 से 112 वाहन अवैध खनन में जब्त किए गए थे, 56.8 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया था और 40 एफआईआर दर्ज की गई थीं। ऐसे में अब सेक्टर-21 से सामने आया यह वीडियो कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर रात के अंधेरे में जेसीबी किसके इशारे पर चली? स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह खुदाई बिना अनुमति की जा रही थी तो रात के समय जेसीबी मशीन मौके तक कैसे पहुंची? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी थी? क्या जमीन की खुदाई के लिए कोई अनुमति या परमिट लिया गया था? क्या मौके पर किसी प्रकार का खनन कार्य किया जा रहा था या यह किसी अन्य अधिकृत निर्माण/विकास कार्य का हिस्सा था? और यदि गतिविधि अवैध थी, तो पुलिस की रात्रि गश्त, नाकों और माइनिंग विभाग की निगरानी के बावजूद यह काम देर रात तक कैसे चलता रहा? माइनिंग विभाग की जांच पर टिकी नजर वीडियो सामने आने के बाद अब निगाहें माइनिंग विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। जरूरत इस बात की है कि मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाया जाए कि कितनी जमीन खोदी गई, कितनी मात्रा में मिट्टी/खनिज निकाला गया, खुदाई किस उद्देश्य से हुई और संबंधित व्यक्ति के पास वैध अनुमति थी या नहीं। पंचकूला प्रशासन ने पूर्व में भी अवैध खनन को रोकने के लिए सख्ती के निर्देश दिए हैं। मई 2026 में शिकायतों के बाद माइनिंग से जुड़े मामलों की जांच के आदेश दिए गए थे और अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अब सबसे बड़ा सवाल—किसके सहारे चल रही थी जेसीबी? सेक्टर-21 जैसे आबादी वाले क्षेत्र में देर रात जेसीबी से खुदाई का वीडियो सामने आना अपने आप में जांच का विषय है। यदि यह अधिकृत कार्य था तो अनुमति और दस्तावेज सामने आने चाहिए, और यदि अनुमति नहीं थी तो कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पंचकूला में माइनिंग गतिविधियों पर पुलिस और प्रशासन द्वारा पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है, ऐसे में अब सवाल यह नहीं है कि माइनिंग के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में खनन जैसी गतिविधि करता है तो उसे प्रशासन और पुलिस का डर क्यों नहीं है? आखिर सेक्टर-21 में देर रात जेसीबी किसकी अनुमति से चली? क्या यह वैध खुदाई थी या कथित अवैध खनन? इन सवालों का जवाब मौके की जांच, अनुमति संबंधी दस्तावेज और माइनिंग विभाग की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।






