पंचकूला (नेहा पांडेय ):आज अंबाला में हरियाणा के हर्बल एवं आयुष उत्पाद निर्माताओं की एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्यभर से अनेक प्रमुख उद्योगपति एवं निर्माता उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य हरियाणा के हर्बल एवं आयुष उद्योग को एक मजबूत मंच प्रदान करना तथा उद्योग से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु सामूहिक प्रयास करना था।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि “Herbal & AYUSH Manufacturers Association (HAMA)” का गठन किया जाए, जो उद्योग के हितों की रक्षा, सरकारी समन्वय एवं नीतिगत सुधारों के लिए कार्य करेगा।इस अवसर पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से किया गया, जो निम्नानुसार है—Chairman: परषोत्तम अग्रवाल
Chairman: कमल भाटिया
President: पृथ्वी सिंघलनवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एसोसिएशन हरियाणा के हर्बल एवं आयुष उद्योग को नई दिशा प्रदान करेगी। साथ ही यह संगठन उद्योग की समस्याओं को सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा तथा गुणवत्ता, नवाचार, नियामकीय सुधार एवं समग्र विकास को बढ़ावा देगा।बैठक में सभी सदस्यों ने एसोसिएशन को मजबूत एवं प्रभावी बनाने का संकल्प लिया तथा भविष्य में अन्य राज्यों के आयुष उद्योग संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग हित में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।आयुष MSME उद्योगों की समस्याओं पर प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषितहरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के आयुष उद्योग संगठनों की संयुक्त बैठक भी इस अवसर पर आयोजित की गई, जिसमें AYUSH ऑनलाइन पोर्टल से संबंधित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आयुष उद्योगों के समक्ष आ रही कठिनाइयों के संबंध में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया जाए।ज्ञापन में कहा गया कि प्रधानमंत्री द्वारा MSME क्षेत्र के लिए जिला स्तर पर योजनाओं की समीक्षा एवं ऑडिट का निर्णय स्वागत योग्य है, जो सरकार की उद्योग-हितैषी सोच को दर्शाता है।साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि AYUSH ऑनलाइन पोर्टल का उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना था, लेकिन वर्तमान में इसकी तकनीकी जटिलताओं के कारण छोटे एवं मध्यम आयुष उद्योगों को अनावश्यक प्रशासनिक बोझ, लाइसेंस में देरी तथा आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।बैठक में यह भी कहा गया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा है, जिसे आज वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हो रही है। ऐसे में आयुष उद्योगों के लिए सरल, पारदर्शी एवं उद्योग-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है।प्रमुख मांगें:
AYUSH ऑनलाइन पोर्टल की स्वतंत्र समीक्षा
MSME इकाइयों से प्रत्यक्ष सुझाव एवं फीडबैक
लाइसेंसिंग एवं अनुपालन प्रक्रिया का सरलीकरण
छोटे उद्योगों पर तकनीकी बोझ में कमी
विशेष हेल्पडेस्क एवं सहायता प्रणाली की स्थापनाइस अवसर पर पुरुषोत्तम अग्रवाल, कमल भाटिया सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए तथा ज्ञापन का समर्थन किया।एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री पृथ्वी सिंघल ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयुष उद्योगों की समस्याओं का सकारात्मक समाधान होगा तथा “आत्मनिर्भर भारत” एवं “विकसित भारत” के लक्ष्य को और मजबूती मिलेगी।







