चंडीगढ़, (तानिया रोहिल्ला):पंजाब पुलिस न केवल अपराधियों से राज्य के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि अपनी प्रमुख पहल ‘सड़क सुरक्षा फोर्स’ (एसएसएफ) के माध्यम से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी नए मानदंड स्थापित कर रही है। यात्रियों की जान बचाने के लिए समर्पित यह हाईवे पेट्रोल फोर्स ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और एआई-आधारित प्रेडिक्टिव प्रणालियों को एकीकृत करके पंजाब पुलिस को भारत की पहली 3डी पुलिस फोर्स बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।समर्पित हाईवे पेट्रोल फोर्स का सकारात्मक प्रभाव उन सड़कों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिन पर यह फोर्स तैनात रहती है। फरवरी 2024 से जनवरी 2026 तक एसएसएफ ने 43,983 सड़क हादसों में पहुंचकर कुल 47,386 लोगों को सहायता प्रदान की। इन कार्रवाइयों के दौरान 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि 27,413 घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाया गया। इस प्रकार इस फोर्स ने तत्काल आपातकालीन सहायता और चिकित्सा मदद के माध्यम से लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।हाईवे सुरक्षा के लिए समर्पित फोर्स के रूप में स्थापित पंजाब एसएसएफ का विशेष ध्यान निर्धारित हाईवे और प्रमुख सड़कों पर गश्त करने पर केंद्रित है। पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के विपरीत, एसएसएफ के जवानों को नियमित कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के लिए तैनात नहीं किया जाता। उनकी मुख्य जिम्मेदारी सड़क सुरक्षा, तत्काल कार्रवाई और हादसा पीड़ितों की सहायता करना है।इस फोर्स के पास 144 हाईटेक वाहन और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारी हैं, जिनमें लगभग 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं। एसएसएफ टीमों को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों तथा प्रमुख जिला सड़कों के 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में हर 30 किलोमीटर पर रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है। एसएसएफ की टीमें हादसों पर औसतन 6 से 10 मिनट में कार्रवाई करती हैं, जो वैश्विक मानकों की तुलना में काफी तेज है।प्लैटिनम 10 मिनट’ के सिद्धांत पर आधारित एसएसएफ कर्मियों का लक्ष्य हादसा पीड़ितों तक छह से आठ मिनट के भीतर पहुंचना है, ताकि एंबुलेंस पहुंचने से पहले उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। एसएसएफ के वाहनों में स्पीड गन, एल्कोमीटर (ब्रेथलाइजर), ई-चालान मशीनें, डैश कैम और प्राथमिक उपचार किट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।इस संबंध में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “कर्मचारियों को क्रैश इन्वेस्टिगेशन और आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया सहित विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। पिछले दो वर्षों की रिपोर्टें लगातार दर्शाती हैं कि एसएसएफ की निगरानी वाले विशेष हाईवे मार्गों पर सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 45-48 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है। एसएसएफ की तैनाती वाले इन मार्गों पर मौतों की संख्या 2023 में 1,955 से घटकर 2024 में 1,016 रह गई। इसका मतलब है कि लगभग एक वर्ष में इन विशेष मार्गों पर करीब 940 लोगों की जान बचाई गई।”पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 27 जनवरी 2024 को जालंधर में एसएसएफ की औपचारिक शुरुआत की थी। पंजाब में सड़क हादसों के कारण होने वाली मौतों की उच्च दर को देखते हुए इस फोर्स का गठन किया गया था, जहां हर रोज औसतन 17-18 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो रही थी।सड़क सुरक्षा के अलावा एसएसएफ की टीमों ने पुलिस प्रवर्तन और लोगों की मदद में भी योगदान दिया है। टीमों ने 6 किलोग्राम अफीम और चोरी किए गए वाहन बरामद किए हैं तथा नकदी और सोना उनके वास्तविक मालिकों तक वापस पहुंचाने में भी मदद की है। टीमों ने 12 से अधिक व्यक्तियों को आत्महत्या करने से रोकने, स्कूली बच्चों की मदद करने तथा देर रात यात्रा करने वाली महिलाओं और पर्यटकों की सहायता करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ईद-ए-मिलादुन्नबी पर गूंजा अमन का पैगाम, सपा नेताओं ने जुलूस-ए-मोहम्मदी का किया स्वागत
पांचवा आयाम (जसबीर/सच कीरत सिंह) अयोध्या:पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिवस ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर फैजाबाद शहर में निकले जुलूस-ए-मोहम्मदी का समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया।…







