तीन हफ्तों में जानलेवा बने ब्रेन ट्यूमर का सफल इलाज, 52 वर्षीय महिला को मिली नई जिंदगी

पंचकुला, 29 जून। पारस हेल्थ पंचकुला के न्यूरोसर्जरी विभाग ने 52 वर्षीय महिला का दुर्लभ और तेजी से बढ़ने वाले ब्रेन ट्यूमर का सफल इलाज कर नई जिंदगी दी। शुरुआत में सामान्य दिखने वाला ट्यूमर मात्र तीन सप्ताह में जानलेवा रूप ले बैठा, लेकिन समय पर पहचान, आधुनिक मॉलिक्यूलर जांच और आपातकालीन सर्जरी से मरीज की जान बचा ली गई। नीलम नामक मरीज को अचानक दौरा (जीटीसीएस) पड़ने के बाद अस्पताल लाया गया। एमआरआई जांच में मस्तिष्क के अगले हिस्से में करीब 1.5 सेंटीमीटर का ट्यूमर मिला, जो दोनों फ्रंटल लोब और कॉर्पस कैलोसम तक फैल चुका था। शुरुआती जांच में यह लो-ग्रेड डिफ्यूज ग्लियोमा प्रतीत हुआ। बायोप्सी में भी ट्यूमर अपेक्षाकृत कम गंभीर दिखा, लेकिन उसकी मॉलिक्यूलर प्रोफाइल (IDH-वाइल्डटाइप) ने भविष्य में इसके आक्रामक होने का संकेत दिया।

अगले तीन सप्ताह में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। दोबारा एमआरआई में सामने आया कि ट्यूमर तेजी से बढ़कर बड़े मैलिग्नेंट मास में बदल चुका है और कॉर्पस कैलोसम में ‘बटरफ्लाई’ पैटर्न में फैल गया है। इससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने और गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का खतरा पैदा हो गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोसर्जरी टीम ने तत्काल क्रेनियोटॉमी कर ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकाल दिया। सफल सर्जरी से मस्तिष्क पर दबाव कम हुआ और मरीज की जान बचाई जा सकी। न्यूरोसर्जरी कंसल्टेंट डॉ. अंकित अमर गुप्ता ने बताया कि यह मामला दर्शाता है कि केवल बायोप्सी के आधार पर ब्रेन ट्यूमर की गंभीरता का आकलन पर्याप्त नहीं होता। कई बार ट्यूमर माइक्रोस्कोप में कम गंभीर दिखाई देता है, लेकिन उसकी मॉलिक्यूलर प्रोफाइल उसके अत्यधिक आक्रामक होने का संकेत देती है। ऐसे मामलों में लगातार निगरानी, उन्नत जांच और समय पर सर्जरी बेहद जरूरी होती है।

पारस हेल्थ पंचकुला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि आधुनिक डायग्नोस्टिक्स, मल्टीडिसिप्लिनरी विशेषज्ञता और समय पर उपचार से जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। यह सफलता प्रिसिजन मेडिसिन और समन्वित चिकित्सा की अहम भूमिका को दर्शाती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ें, लगातार सिरदर्द रहे या अन्य असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर निदान और उपचार से गंभीर ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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