पंचकूला, (दिव्या राणा) पारस हेल्थ पंचकूला ने शहर का पहला लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लीवर की गंभीर बीमारी और किडनी संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे 44 वर्षीय मरीज का करीब आठ घंटे तक चला ट्रांसप्लांट किया गया। मरीज की 42 वर्षीय पत्नी ने अपने लीवर का दायां हिस्सा दान किया, जिससे उनकी जान बचाने में मदद मिली। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज और उनकी पत्नी दोनों की सेहत में अच्छा सुधार हुआ है।यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्ध डोनर अंगों के बीच बड़ा अंतर है। ऐसे में अंतिम अवस्था की लीवर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवित डोनर से ट्रांसप्लांट एक महत्वपूर्ण विकल्प बन गया है। द नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित 2025 के एक विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में कुल 3,920 लीवर ट्रांसप्लांट किए गए, जिनमें से 3,183 जीवित डोनर से जुड़े थे। इस मामले में मरीज की पत्नी ने अपने लीवर का दायां हिस्सा दान किया, जिससे ट्रांसप्लांट संभव हो सका। चिकित्सा उपचार के बावजूद मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी।मरीज को लीवर सिरोसिस की गंभीर अवस्था के साथ पेट में पानी भरने, मानसिक स्थिति प्रभावित होने और किडनी की कार्यक्षमता बिगड़ने जैसी समस्याएं थीं। दवाओं से उनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था। खून के थक्के जमने में परेशानी, प्लेटलेट्स की कमी, कुपोषण और मांसपेशियों की कमजोरी के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। विशेषज्ञों की विस्तृत जांच और आपसी विचार-विमर्श के बाद उनकी पत्नी को लीवर दान करने के लिए उपयुक्त पाया गया।आठ घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. अंकुर गर्ग, डॉ. वैभव कुमार, प्रो. ग्रुप कैप्टन डॉ. सुमेष कैस्था, डॉ. करण मिड्ढा और डॉ. राघव बंसल ने किया। इसमें लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी, एनेस्थीसिया, गहन चिकित्सा, लीवर रोग और किडनी रोग विशेषज्ञों सहित विभिन्न विभागों की टीम ने समन्वय के साथ काम कियापारस हेल्थ पंचकूला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा कि यह उपलब्धि क्षेत्र में जटिल और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विभिन्न विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।अस्पताल के अनुसार, मरीज की पत्नी को एक सप्ताह के भीतर छुट्टी दे दी गई। वहीं, ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के लीवर और किडनी की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और लगभग दो सप्ताह बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई। दोनों अब धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौट रहे हैं और नियमित जांच के लिए अस्पताल आ रहे हैं।जीवित व्यक्ति द्वारा लीवर का एक हिस्सा दान करना उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, जिन्हें उपयुक्त मृतक डोनर का अंग उपलब्ध नहीं हो पाता। हालांकि, इसके लिए डोनर की विस्तृत चिकित्सकीय जांच, सुरक्षा और स्वेच्छा से सहमति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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