प्रेगनेंसी में सीमित मात्रा में घी खाना तभी अच्छा है जब शुद्ध हो। डॉ अर्चिता महाजन सीनियर डाइटिशियन शाह हॉस्पिटल कैथल

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि प्रेग्नेंसी के समय घी खाने को भले ही ओल्ड फैशन कहा जाए पर साइंस इसे फैटी एसिड सप्लीमेंटेशन कहता है। घी में पाया जाने वाला ब्यूटिरिक एसिड भ्रूण के दिमागी विकास और आंत की परत बनने में मदद करता है। इसके अलावा, यह प्रेग्नेंसी में मदर के हॉर्मोन्स को भी बैलेंस करता है।प्रेगनेंसी में सीमित मात्रा (रोजाना 1-2 चम्मच) में घी खाना सुरक्षित और फायदेमंद है。यह शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करता है, पाचन सुधारता है, और माँ को ऊर्जा देता है。हालांकि, यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि नौवें महीने में ज्यादा घी खाने से नॉर्मल डिलीवरी पक्की हो जाती है。ज्यादा घी खाने से वजन बढ़ सकता है और शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है。विशेष जानकारी और सावधानियां:मात्रा: पूरे दिन में 2 से 3 छोटे चम्मच से ज्यादा घी न खाएं।प्रेगनेंसी में सीमित मात्रा (रोजाना 1-2 चम्मच) में घी खाना सुरक्षित और फायदेमंद है।。यह शिशु के मस्तिष्क के विकास में मदद करता है, पाचन सुधारता है, और माँ को ऊर्जा देता है。गर्भावस्‍था के दौरान अपच और एसिडिटी होना आम बात है। जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, वैसे-वैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता जाता है। इससे आंतों पर दबाव पड़ता है और अम्‍लीय रस ऊपर की ओर आ जाता है। आहार में घी को शामिल कर पाचन प्रक्रिया में सुधार लाया जा सकता है। ये आंतों में एसिड के स्‍तर को भी कम करता है।​शिशु का विकासघी भ्रूण और मस्तिष्‍क के विकास में मदद करता है। प्रेग्‍नेंसी के दूसरे और तीसरे चरण में महिलाओं को रोजाना 300 अतिरिक्‍त कैलोरी की जरूरत होती है। घी से इस अतिरिक्‍त कैलोरी की आवश्‍यकता को पूरा किया जा सकता है। इससे शिशु और मां दोनों को पोषण मिलता है।

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