भारतीय सेना में 40 वर्षों की अतुल्य सेवा , विशेषकर सियाचिन और पूर्वोत्तर संवेदनशील क्षेत्रों में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन महोदय की सेवा को भुलाया नहीं जा सकता है । इनके कुशल नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण को स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा , ऐसा मेरा मानना है । महामहिम हसनैन साहब ने कठिन क्षेत्रों में वृक्षारोपण , स्वच्छता और पर्यावरण अनुकूल सैन्य अभियानों का कुशल नेतृत्व कर एक इतिहास रचने का काम किया है । एक प्रमुख रणनीतिकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पूर्व सदस्य के रूप में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में महामहिम राज्यपाल महोदय का योगदान पूरे देश के लिए अनुकरणीय है ।आज पर्यावरण संकट से पूरी दुनिया त्रस्त है । इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन जिम्मेवार है । राज्यपाल महोदय की प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति अभूतपूर्व सोच इनकी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है ।महामहिम हसनैन महोदय के सार्वजनिक संबोधनों, लेखों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में इनका योगदान अविस्मरणीय है । आज वैश्विक स्तर पर मौजूद पर्यावरण संकट से निजात पाने में महामहिम महोदय का परिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए रखने की दिशा में किया गया प्रयास हम सबों के लिए एक प्रेरणादायक ब्लूप्रिंट ( रुप रेखा ) के रूप में कार्य करता है , ऐसा मेरा स्पष्ट मानना है । भारतीय सेना में विभिन्न उच्चस्थ पदों पर रहते हुए अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद महामहिम महोदय की पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान काबिले तारीख है और पूरे देश के लिए अनुकरणीय है ।कई प्रतिष्ठित अवार्डों से सम्मानित माननीय लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन साहब का राष्ट्र प्रेम और समर्पण , भारत की सुरक्षा में उनकी अहम भूमिका और पर्यावरण संरक्षण के प्रति इनकी गहरी अभिरुचि के कारण मैं ऐसे भारत माता के सपूत को सलाम करता हूं ।अंत में , बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन महोदय द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए बहुमूल्य योगदान के कारण मैं उन्हें एक पर्यावरणविद् के रूप में भी देखता हूं ।









