पांचवा आयाम (जसबीर/ सच कीरत सिंह) अयोध्या रामनगरी की धार्मिक पहचान भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ मां आदिशक्ति की आराधना से भी जुड़ी है। अयोध्या कैंट स्थित मां पाटेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां भक्त मां के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। नवरात्र के अवसर पर देवी आराधना का महत्व और बढ़ जाता है तथा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।मंदिर के अध्यक्ष रमेश यादव ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मां के प्रति श्रद्धा और विश्वास के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ शीश झुकाते हैं। मां के प्रति विश्वास भक्तों को आध्यात्मिक संबल प्रदान करता है। मंदिर की परंपराओं को बनाए रखना और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।मंदिर के प्रबंधक अभिजीत बिसेन ने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा देने वाला केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि मां के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना और धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना प्राथमिकता है। मां आदिशक्ति के प्रति अटूट विश्वास लोगों को सकारात्मकता, धैर्य और मानव सेवा की प्रेरणा देता है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में श्रद्धालुओं का सहयोग महत्वपूर्ण है।मंदिर के उपाध्यक्ष रमेश पांडेय भी मंदिर की धार्मिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। मां की आराधना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं का संदेश भी देती है। भक्तों के लिए देवी का दरबार ऐसा आध्यात्मिक स्थान है, जहां वे अपनी चिंताओं को मां के चरणों में अर्पित कर मन की शांति अनुभव करते हैं।मंदिर का धार्मिक महत्व अयोध्या कैंट स्थित मां पाटेश्वरी मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा है। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की उपासना, पूजा-अर्चना और दर्शन का विशेष महत्व रहता है। श्रद्धालु मां से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं। मां की भक्ति के साथ सेवा और सद्भाव की भावना धार्मिक जीवन को नई दिशा देती है।






