पांचवा आयाम ( जसबीर/सच कीरत सिंह) अयोध्या:डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में बुधवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने युवाओं से शिक्षा को संस्कार, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल उपाधि देने का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण संस्थान है। युवाओं को ज्ञान के साथ संवेदना, स्वाभिमान और जिम्मेदारी को जीवन का आधार बनाना चाहिए।समारोह में राज्यपाल ने 104 मेधावी विद्यार्थियों को 120 स्वर्ण पदक प्रदान किए। इनमें 86 स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए। इसके साथ ही स्नातक एवं परास्नातक की 1,66,055 उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर में समावेशित किया गया। छात्राओं की उपलब्धि को उन्होंने महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की बढ़ती ताकत का प्रतीक बताया।राज्यपाल ने कहा कि अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से शिक्षा प्राप्त कर निकलने वाले विद्यार्थियों का दायित्व है कि वे अपनी गौरवशाली विरासत से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करने की अपील की।उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग को गंभीर चुनौती बताते हुए विद्यार्थियों से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और स्वच्छता को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। महिला सशक्तिकरण पर उन्होंने कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त भविष्य की नींव रखती है तथा बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान जरूरी है।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री पाने का अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदार जीवन की शुरुआत है। युवाओं को ज्ञान के साथ चरित्र, सफलता के साथ विनम्रता और तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मोरल इंटेलिजेंस और मानवीय संवेदना के महत्व को रेखांकित किया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने शिक्षा को संस्कार, रोजगारपरक कौशल और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से डिग्री के साथ जिम्मेदारी लेकर आगे बढ़ने तथा शोध, नवाचार और तकनीक के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय का विकास प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय से पांच जनपदों के 659 महाविद्यालय एवं संस्थान संबद्ध हैं और करीब छह लाख विद्यार्थी इससे जुड़े हैं। विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रम, शोध, खेल, डिजिटल शिक्षा, नवाचार और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए मियांबाकी पद्धति से करीब दस हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया और आंगनबाड़ी किट वितरित कीं। एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए अयोध्या, बाराबंकी और सुलतानपुर के अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। समारोह में विश्वविद्यालय की प्रथम महिला मीना सिंह, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर, मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, अभिभावक और उपाधिधारक मौजूद रहे।
दीक्षांत समारोह का संदेश स्पष्ट रहा—शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह युवा शक्ति को चरित्र, संवेदना और जिम्मेदारी से जोड़कर विकसित भारत की आधारशिला बनाए।







