डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि देश के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण, लंबे समय तक मच्छर भगाने वाली कॉइल का घरों में यूज, सेकेंड हैंड स्मोकिंग और कुछ मामलों में जेनेटिक कारण भी कैंसर का खतरा बढ़ता है।कुछ समय से देखा जा रहा है कि अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहना भी है खतरनाक साबित हो सकता है. यह भी लंग्स कैंसर का रिस्क बढ़ा देता है. अगरबत्ती के धुएं से लंग कैंसर (फेफड़ों के कैंसर) का खतरा बढ़ सकता है। नियमित रूप से और लंबे समय तक अगरबत्ती के धुएं के संपर्क में रहना फेफड़ों की सेहत के लिए बेहद हानिकारक माना गया है।मुख्य कारण और स्वास्थ्य जोखिमहानिकारक कण (Particulate Matter): अगरबत्ती जलने पर बारीक और अति-सूक्ष्म कण (PM2.5) निकलते हैं। ये फेफड़ों की गहराई तक जाकर जमा हो जाते हैं।जहरीली गैसें: इसके धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, टॉलूइन और एल्डिहाइड जैसी खतरनाक गैसें होती हैं।कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले तत्व): कुछ शोध बताते हैं कि अगरबत्ती के धुएं में सिगरेट के धुएं की तरह ही कार्सिनोजेन्स पाए जाते हैं, जो फेफड़ों की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।तंबाकू के धुएं से तुलना: कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बंद कमरे में अगरबत्ती का धुआं सिगरेट के धुएं से भी अधिक हानिकारक साबित हो सकता है।







