सचिन पायलट बोले क्या कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज कर जांच नहीं होनी चाहिए

चंडीगढ़ (तानिया रोहिल्ला) : पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी महासचिव सचिन पायलट के नेतृत्व में आज हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के घर की ओर मार्च किया। कांग्रेस कार्यकर्ता दलित व्यक्ति गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले में चीमा के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने बड़ी संख्या में जवान तैनात करके प्रदर्शनकारियों को चीमा के घर तक पहुंचने से रोक दिया। पुलिस ने आगे बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए वाटर कैनन भी चलाए। वाटर कैनन के इस्तेमाल से वरिष्ठ नेता कुलजीत सिंह नागरा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हो गए। इस मौके पर सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस का वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के खिलाफ कोई निजी मामला नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि जब किसी व्यक्ति ने अपने आखिरी बयान में मंत्री का नाम लिया है, तो क्या कानून के अनुसार स्नढ्ढक्र दर्ज कर जांच नहीं होनी चाहिए? पायलट ने कहा कि गुलजार सिंह की आत्महत्या पंजाब के हालात को दिखाती है। उन्होंने कहा कि आप सरकार जो दावे कर रही है, जमीन पर हालात उससे बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने आप को याद दिलाया कि चुनाव से पहले पार्टी ने दलित उपमुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि दलित उपमुख्यमंत्री बनाना तो दूर, आप सरकार में गुलजार सिंह जैसे दलितों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अरविंद केजरीवाल के चुनाव से पहले किए गए उस वादे का जिक्र करते हुए कि सरकार बनने के तीन महीने में ड्रग्स खत्म कर दिए जाएंगे, पायलट ने कहा कि आप के करीब पांच साल के शासन के बाद पंजाब में च्चिट्टाज् इतनी आसानी से मिल रहा है कि अब इसकी च्च्होम डिलीवरीज्ज् तक हो रही है। वरिष्ठ पंजाब कांग्रेस नेताओं, पीसीसी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सीएलपी नेता प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी आप सरकार को घेरते हुए कहा कि आप सरकार पंजाब की सबसे खराब सरकार साबित हुई है। सभी कांग्रेस नेताओं ने सचिन पायलट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सबसे बड़ा लक्ष्य २०२७ का विधानसभा चुनाव जीतना है। नेतृत्व का फैसला बाद में पार्टी हाईकमान करेगा। इस मौके पर पीसीसी अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सीएलपी नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ब्रह्म मोहिंद्रा, विजय इंदर सिंगला, राणा के.पी. सिंह, डॉ. अमर सिंह, सुखपाल सिंह खैरा, राणा गुरजीत सिंह, गुरजीत सिंह औजला, भारत भूषण आशु, डॉ. राज कुमार वेरका, सुखविंदर सिंह डैनी, संगत सिंह गिलजियां, कुलजीत सिंह नागरा, अमरप्रीत लाली, लखवीर सिंह लखा, बलबीर सिंह सिद्धू, अमित विज, पवन आदिया, सुखविंदर सिंह सरकारिया, इंद्रबीर बुलारिया, गुरकीरत सिंह, बलजीत कौर सहित कई नेता मौजूद रहे।

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