डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र में परिवार शुरू करने की योजना के कारण इंफर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. गर्भनिरोधक के बिना एक साल तक नियमित सहवास के बावजूद गर्भधारण न कर पाने को वैज्ञानिक इंफर्टिलिटी मानते हैं, जिसके कई कारण हो सकते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया की लगभग 17.5 प्रतिशत आबादी किसी-न-किसी रूप में इंफर्टिलिटी से प्रभावित है. भारत में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चा न होने के लिए केवल महिला को जिम्मेदार ठहराना गलत है. लगभग आधे मामलों में पुरुष संबंधी कारण भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं.क्यों होती है इंफर्टिलिटी इंफर्टिलिटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इनमें असंतुलित खान-पान, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, तनाव, आनुवंशिक कारण और बढ़ती उम्र प्रमुख हैं. महिलाओं में पीसीओएस (PCOS), एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड या फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने जैसी समस्याएं गर्भधारण में बाधा बन सकती हैं. वहीं पुरुषों में कम स्पर्म काउंट, स्पर्म की खराब गुणवत्ता, संक्रमण या प्रजनन नलिकाओं में रुकावट इसकी वजह हो सकती है.इनफर्टिलिटी (बांझपन) के लिए केवल महिलाएं नहीं, बल्कि पुरुष भी लगभग 40% से 50% मामलों में समान रूप से जिम्मेदार होते हैं। यह समस्या किसी एक की गलती नहीं, बल्कि दोनों पक्षों से जुड़ी हो सकती है।पुरुषों में इनफर्टिलिटी के कारणकम स्पर्म काउंट: शुक्राणुओं की संख्या कम होना।स्पर्म की खराब क्वालिटी: शुक्राणुओं का आकार या उनकी गतिशीलता ठीक न होना।मेडिकल समस्याएं: वैरिकोसेल (अंडकोष की नसों में सूजन) या हार्मोन असंतुलन।बुरी आदतें: धूम्रपान, अत्यधिक शराब पीना और मोटापा।







