21 से 23 अगस्त तक होगा ‘समाधान समारोह-2026’, सुप्रीम कोर्ट की पहल पर अयोध्या में मध्यस्थता से सुलझेंगे वर्षों पुराने विवाद

पांचवा आयाम (जसबीर/ सच कीरत सिंह) अयोध्य
न्याय तक आसान, त्वरित और सौहार्दपूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अयोध्या में “समाधान समारोह-2026” को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर पैरा लीगल वालंटियर्स (PLVs) गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचकर लोगों को मध्यस्थता के जरिए विवाद निपटाने के लाभ बता रहे हैं। उद्देश्य स्पष्ट है—लंबे समय से लंबित मुकदमों को आपसी सहमति से समाप्त कर न्याय प्रक्रिया को अधिक सरल, प्रभावी और मानवीय बनाना।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की पहल पर 21 से 23 अगस्त, 2026 तक “समाधान समारोह-2026” का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका समाधान मध्यस्थता और आपसी सहमति के माध्यम से संभव है।
इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मध्यस्थता के लिए चिन्हित कई वाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अयोध्या को भेजे गए हैं। संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्थित मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) में उपस्थित होकर आपसी संवाद और सहमति के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जो पक्षकार अभी तक उपस्थित नहीं हुए हैं, उन्हें पुनः नोटिस भेजे जा रहे हैं ताकि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने विवाद का शीघ्र, सरल और स्थायी समाधान प्राप्त कर सकें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उन सभी पक्षकारों से विशेष अपील की है, जिनके मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं अथवा मध्यस्थता के लिए अयोध्या भेजे गए हैं, कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता करते हुए आपसी सहमति से अपने विवादों का निस्तारण कराएं। राज्य पक्षकार वाले मामलों में विभिन्न सरकारी विभागों से भी इस समाधान अभियान में भाग लेकर मध्यस्थता के माध्यम से लंबित मामलों का निस्तारण कराने का अनुरोध किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यस्थता ऐसी प्रभावी व्यवस्था है, जिसमें समय और धन दोनों की बचत होती है तथा आपसी रिश्तों में कटुता के बजाय विश्वास और सौहार्द कायम रहता है। यही कारण है कि “समाधान समारोह-2026” को वैकल्पिक विवाद निस्तारण की दिशा में न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल माना जा रहा है।

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