क्या आपके भी हाथ की ग्रिप कमजोर हो रही है? डॉ अर्चिता महाजन

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि 44 साल के पुरुष में अगर 27 किलो वजन उठाने या होल्ड करने की क्षमता नहीं है. महिलाओं में 18 किलो वज़न उठाने या होल्ड करने की क्षमता नहीं है. इसका मतलब है कि उनकी मांसपेशियों की ताकत कम हो चुकी है.ग्रिप स्ट्रेंथ को अब आपके पूरे स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.हाथों की पकड़ कमजोर होने का मतलब ये भी लगाया जा सकता है कि आपको बार बार बीमारियों की वजह से अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ने वाली है. रिसर्च में ये साबित किया है, अगर हाथों की ग्रिप (पकड़) सही नहीं है या धीरे धीरे कम होती जा रही है तो आपको ये बीमारियां हो सकती हैं.डायबिटीज,दिल की बीमारी
स्ट्रोक,किडनी और लिवर की खराबी फ्रैक्चर,कमज़ोर हड्डियां,कुछ तरह के कैंसर एक अध्ययन में पाया गया कि यह ब्लड प्रेशर की तुलना में जल्दी मृत्यु के जोखिम का बेहतर अनुमान लगा सकती है.कई देशों में खासकर युवाओं के बीच ग्रिप स्ट्रेंथ लगातार कम होती जा रही है.जर्मनी की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉज़िट्ज़ में मेडिकल सोशियोलॉजी के प्रोफेसर योहानेस बेलर कहते हैं, “एक पीढ़ी में ताकत की यह कमी केवल कमज़ोर हाथों की बात नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी के भविष्य के स्वास्थ्य के बारे में एक शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है.”वह कहते हैं, “यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि कंप्यूटर बेस्ड और लंबे समय तक बैठे रहने वाले कामों की ओर बढ़ता रुझान शारीरिक फिटनेस में गिरावट का कारण बन रहा है.”मुमकिन है कि इसी वजह से ग्रिप स्ट्रेंथ भी प्रभावित हो रही हो.आपको एक टेनिस बॉल को जितनी ज़ोर से हो सके दबाने में सक्षम होना चाहिए और उस पकड़ को 15–30 सेकंड तक बनाए रखना चाहिए.लेकिन सवाल सिर्फ हाथों की पकड़ को मज़बूत करने का नहीं, बल्कि आपकी पूरी शारीरिक फिटनेस को बेहतर बनाने के बारे में भी है.हाथों की पकड़ कमजोर होने को मेडिकल भाषा में सारकोपीनिया बीमारी का नाम दिया गया है. इस बीमारी में धीरे धीरे मांसपेशियों की ताकत कमजोर होने लगती है और उनके काम करने की क्षमता कम होने लगती है. ऐसी बीमारी के शिकार लोगों में दिल का मरीज होने का खतरा भी ज्यादा रहता है.

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