पंचकुला : (राजकुमार) कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ने प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे समाधान शिविरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं, अगर वहीं पर लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा तो फिर ऐसे शिविर लगाने का क्या फायदा है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी समस्याएं लेकर उम्मीद के साथ समाधान शिविरों में पहुंचते हैं, लेकिन कई लोगों को वहां से भी निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
प्रदीप चौधरी ने कहा कि प्रशासन को यह बताना चाहिए कि अब तक लगाए गए समाधान शिविरों में कितनी शिकायतें आईं और उनमें से कितनों का मौके पर समाधान हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि मोरनी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान जनता ने जो समस्याएं रखी थीं, उनमें से कितनी दूर हुईं और रात्रि ठहराव कार्यक्रमों में मिली शिकायतों पर कितना काम हुआ, इसकी जानकारी भी जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
पूर्व विधायक ने कहा कि एक तरफ अधिकारी और कर्मचारी समाधान शिविरों में व्यस्त रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ आम लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। लोग किराया खर्च कर दूर-दराज से अपने काम करवाने आते हैं, लेकिन दफ्तर पहुंचकर पता चलता है कि अधिकारी शिविर में गए हुए हैं। इंतकाल सहित कई जरूरी कामों के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को केवल शिविर नहीं, बल्कि समय पर समाधान चाहिए। प्रशासन ऐसी व्यवस्था बनाए कि लोगों के काम दफ्तरों और शिविर दोनों जगह बिना परेशानी पूरे हो सकें।






