हरियाणा में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती, 84 विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी

चंडीगढ़ (दिव्या राणा) : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने बताया कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वर्तमान में हरियाणा में भारत सरकार के मानकों (69) के मुकाबले कुल 101 प्रथम रेफरल इकाइयां (FRUs) संचालित हैं। हालांकि, इनमें से अधिकतर एफआरयू 24×7 आधार पर बेहतर सेवाएं दे रहे हैं और रात-दिन प्रसव एवं सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण 11 एफआरयू में सेवाएं अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रही थीं। इस समस्या का त्वरित समाधान करते हुए एनएचएम मुख्यालय द्वारा बिना किसी प्रशासनिक देरी के डॉक्टरों की भर्ती के लिए हर बुधवार को वॉक-इन वर्चुअल इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके तहत 84 विशेषज्ञों को अनंतिम रूप से अंतिम रूप दिया गया है और 24×7 रक्त जांच सुविधाएं भी चालू कर दी गई हैं। डॉ ढिल्लो ने बताया कि ऑप्टीमल लेवल से कम प्रदर्शन करने वाले एफआरयू में बेहतर चिकित्सीय हस्तक्षेप और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक विशेष ‘ट्रायड’ यानी तिकड़ी (स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट) तैनात करने का फैसला किया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत जिन केंद्रों पर डॉक्टरों की तिकड़ी पूरी नहीं है, वहां हर बुधवार और शनिवार को डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इस पहल के तहत अंबाला का सीएचसी चौरमस्तपुर, भिवानी का एसडीएच लोहारू, फतेहाबाद का सीएचसी भट्टू कलां व सीएचसी भूना, गुरुग्राम का एसडीएच पटौदी, झज्जर का एसडीएच मातनहेल व सीएचसी छारू, जींद का सीएचसी आलेवा, नूंह का सीएचसी पिनगवां, तथा रेवाड़ी का सीएचसी बावल व सीएचसी नाहर शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा के मिशन निदेशक डॉ. आर.एस. ढिल्लों ने आगे बताया कि विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए जिला नागरिक अस्पतालों या अन्य पूरी तरह क्रियाशील एफआरयू से डॉक्टरों की रोस्टर के अनुसार बुधवार और शनिवार को इन 11 केंद्रों पर तैनाती संस्थागत रूप से तय कर दी गई है। अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान ये विशेषज्ञ डॉक्टर समर्पित ओपीडी क्लिनिक चलाएंगे, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं (HRP) की जांच करेंगे, नियोजित सिजेरियन ऑपरेशन शेड्यूल करेंगे और आपातकालीन प्रसूति मामलों को संभालेंगे। डॉ. ढिल्लों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कदम से सभी एफआरयू पूरी तरह कार्यात्मक बनेंगे, स्थानीय नागरिकों का स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ेगा और गर्भवती महिलाओं को आपात स्थिति में दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उन्हें उनके नजदीक ही समय पर जीवनरक्षक देखभाल मिल सकेगी।

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