पांचवा आयाम (जसबीर/ सच कीरत सिंह) :अयोध्या:दीपोत्सव की आभा, रामनगरी की विरासत और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को विश्वस्तरीय पहचान देने की दिशा में अयोध्या मंडल के पर्यटन विकास की नई पटकथा लिखी जा रही है। गुरुवार को आयुक्त सभागार में अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने मंडल की पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ विभाग की प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि विकास केवल निर्माण तक सीमित न रहे, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को नई ऊंचाई देने वाला हो।बैठक में मंडलायुक्त राजेश कुमार ने अयोध्या मंडल में चल रही परियोजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण करते हुए समयबद्ध क्रियान्वयन, गुणवत्ता और विभिन्न विभागों के समन्वय पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पहचान उसकी आध्यात्मिक विरासत है और विकास कार्य उसी गरिमा के अनुरूप होने चाहिए। बैठक में रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी, नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार तथा मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत करीब 110 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 41 पर्यटन परियोजनाओं पर विस्तार से विचार हुआ। इनमें अयोध्या के ऐतिहासिक जलकल भवन को ‘परंपरा हेरिटेज बिल्डिंग’ के रूप में विकसित करने, अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के कार्यालय एवं पर्यटक सुविधा केंद्र की स्थापना, प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक संकेतक, पार्किंग और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई। साथ ही लता मंगेशकर चौक के सौंदर्यीकरण तथा भारत माता मंदिर, बौरा बाबा मठिया, प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर और आशा देवी मंदिर के विकास की योजनाओं की भी समीक्षा हुई।बैठक में अमेठी, बाराबंकी, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर की प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी मंथन हुआ। बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर की लगभग 48.77 करोड़ रुपये की विकास परियोजना की प्रगति संतोषजनक पाई गई। वहीं सरयू नदी पर तैयार हो रहा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट दीपोत्सव से पहले शुरू करने की तैयारी की जानकारी दी गई, जिससे रामनगरी के रिवरफ्रंट पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान अयोध्या में निर्माणाधीन वैदिक शोध संस्थान, पूरा बाजार में अमर शहीद जगदंबा प्रसाद पांडेय स्मारक, अंबेडकरनगर के रामलीला मैदान के सौंदर्यीकरण तथा बाराबंकी में पद्मश्री बाबू के.डी. सिंह के पैतृक आवास को स्मारक संग्रहालय के रूप में विकसित करने की प्रगति पर भी चर्चा हुई। धर्मार्थ कार्य विभाग ने रामपथ, हवेली अवध क्षेत्र की पार्किंग, श्रवण धाम, पंचमुखी मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास से जुड़े नौ महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए।अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं में जनप्रतिनिधियों से निरंतर समन्वय रखा जाए तथा गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकार्पण और भूमिपूजन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से ही होंगे। निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छोटी परियोजनाओं को अगले चार से पांच माह में पूरा करने, नियमित स्थलीय निरीक्षण और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।आगामी दीपोत्सव और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह बैठक केवल विकास योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि रामनगरी की आध्यात्मिक गरिमा, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षमता को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।







