झज्जर : (राजकुमार):आधुनिकता की तेज रफ्तार में जहां हमारी पुरानी जीवनशैली, रीति-रिवाज और पारंपरिक रहन-सहन धीरे-धीरे अतीत की यादों में सिमटते जा रहे हैं, वहीं हरियाणवी संस्कृति की अनमोल विरासत को सहेजने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे गीत ‘रीत पुरानी-2’ की दो दिवसीय शूटिंग 11 व 12 अक्टूबर को जिला झज्जर के गांव कासनी में संपन्न हुई। पिछले वर्ष 16 नवंबर को रिलीज हुए ‘रीत पुरानी’ गीत को दर्शकों से मिले भरपूर प्यार और प्रोत्साहन के बाद इसके दूसरे भाग को लेकर टीम में विशेष उत्साह है। नवरात्रों के पावन अवसर पर शूटिंग का शुभारंभ रामचंद्र पहलवान ने विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया।बाला मूवीज़ के बैनर तले तैयार हो रहे इस गीत के निर्माता-निर्देशक विजय बालाजी हैं। गीत को अनुप शर्मा ने संगीतबद्ध किया है, जबकि अपनी मधुर आवाज से इसे सजाया है गायक नितिन तिरखा ने। गीत के बोल रणवीर धनखड़ ने लिखे हैं। इस प्रस्तुति के माध्यम से हरियाणा की पुरानी संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली, रीति-रिवाजों और लोक परंपराओं को नए अंदाज में दर्शकों के सामने लाने का प्रयास किया गया है, ताकि नई पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित हो सके।गीत में लाइसेंस फिल्म सहित विभिन्न हरियाणवी फिल्मों और नाटकों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके उत्तर भारत के चर्चित अभिनेता राजकुमार धनखड़ के साथ विजय कालीरमन, संजय दलाल, संजीव सांपला, रणवीर धनखड़, बबीता गुज्जर, अनिल देवी और शिवानी धनखड़ सहित अनेक स्थानीय कलाकारों एवं बाल कलाकारों ने अभिनय किया है। सभी कलाकारों ने हरियाणवी परिवेश और पारंपरिक जीवनशैली को पर्दे पर जीवंत रूप देने के लिए अपना योगदान दिया। गीत के फिल्मांकन में ग्रामीण संस्कृति, पुराने समय के रहन-सहन और लोक परंपराओं को विशेष रूप से उभारने का प्रयास किया गया है।निर्माता-निर्देशक विजय बालाजी ने बताया कि गीत के बोलों के अनुरूप दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली ऐसी अनेक पुरानी वस्तुओं को फिल्मांकन में शामिल किया गया है, जो कभी घर-परिवार और ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थीं, लेकिन आज बहुत कम देखने को मिलती हैं। आधुनिकता के चलते धीरे-धीरे लुप्त हो रही पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों और रहन-सहन को भी गीत में स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य दर्शकों को बीते समय की यादों से जोड़ने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को उस जीवनशैली से परिचित करवाना है, जिसमें सादगी, आपसी मेलजोल और पारिवारिक-सामाजिक संबंधों का विशेष महत्व हुआ करता था। उन्होंने गाने को अभीनय के बल पर जिवंत बनाने के लिए सभी कलाकारों का, शुटिंग में सहयोग करने के लिए ग्राम पंचायत कासनी, कासनी समाज कल्याण सेवा समिति व समस्त ग्रामवासियों का धन्यवाद अदा किया ।गांव के सरपंच प्रतिनिधि उमेद सिंह ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति पर आधारित ऐसे गीत युवाओं को अपनी पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक पहनावे से परिचित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।ग्राम पंचायत कासनी की सरपंच अनिल देवी ने कहा कि गांव में हरियाणवी संस्कृति से जुड़े भजन, गीत, नाटक और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शूटिंग के लिए ग्राम पंचायत की ओर से भरपूर सहयोग दिया जाता है। इस प्रकार की शूटिंग से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही, अन्य कलाकारों का अभिनय और काम करने का तरीका देखकर युवाओं में भी कला एवं अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने की रुचि पैदा होती है। उन्होंने कहा कि गांवों में सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है, बल्कि ग्रामीण परिवेश और हरियाणवी संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक है।हरियाणवी फिल्मों और नाटकों में अपनी अलग पहचान बना चुके अभिनेता राजकुमार धनखड़ ने ‘रीत पुरानी-2’ के निर्माण के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को समर्पित ऐसे गीतों का निर्माण सराहनीय प्रयास है। उन्होंने भविष्य में भी हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले इस प्रकार के कार्यों में यथासंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।गीत के लेखक रणवीर धनखड़ ने बताया कि पिछले वर्ष रिलीज हुए ‘रीत पुरानी’ गीत को दर्शकों का भरपूर स्नेह मिला था। गीत देखने के बाद अनेक दर्शकों ने फोन करके इसी तरह की और प्रस्तुतियां तैयार करने का सुझाव दिया। दर्शकों के इस प्यार और प्रोत्साहन ने उन्हें ‘रीत पुरानी-2’ लिखने की प्रेरणा दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस प्रकार पहले गीत को दर्शकों ने पसंद किया, उसी प्रकार दूसरा भाग भी लोगों के दिलों में जगह बनाएगा और हरियाणवी संस्कृति से जुड़ाव को और मजबूत करेगा।रीत पुरानी-2’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि बीते समय की जीवनशैली, पुरानी वस्तुओं, पारंपरिक पहनावे और सामाजिक रीति-रिवाजों को सहेजने का एक सांस्कृतिक प्रयास है। समय के साथ जीवनशैली बदलना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को याद रखना भी उतना ही आवश्यक है। हमारी पुरानी वस्तुएं बीते दौर की कहानी कहती हैं, लोकगीत हमारी भावनाओं को स्वर देते हैं और रीति-रिवाज हमारी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। ऐसे प्रयासों से हरियाणा की मिट्टी की महक, लोक संस्कृति की मिठास और पुरानी परंपराओं की पहचान आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहेगी।






