गुरुग्राम में मुनिश्री 108 विनम्र सागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश

गुरुग्राम ,(दिव्या राणा) : श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैकबपुरा में शनिवार सुबह सात बजे परम पूज्य संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं प.पू. अभिनवाचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य परम पूज्य मुनिश्री 108 विनम्र सागर जी महाराज ससंघ (मुनि श्री 108 निस्वार्थ सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 निसर्ग सागर जी महाराज) तीन पिच्छी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से जैन संतों का भव्य स्वागत करते हुए आशीर्वाद लिया गया।
श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के प्रधान नरेश कुमार जैन, उप-प्रधान शैलेंद्र जैन, महामंत्री अशोक कुमार जैन और सह-मंत्री जितेंद्र जैन ने बताया कि शनिवार की सुबह स्वास्तिक सदन निर्दोष जैन के आवास से गाजे-बाजे के साथ जैन संतों का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट ने बताया कि जैन बारादरी जैकबपुरा में हुए मंगल प्रवेश पर गुरुग्राम के सभी जैन मंदिरों की समाज एकजुट होकर पहुंची। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इस दौरान श्री विनय जैन व दिव्या जैन ने गुरु जी के पद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया। इसके बाद स्व. विनोद जैन की धर्मपत्नी मंजू जैन, पुत्र ऋषभ जैन वंशिका जैन ने गुरु जी को शास्त्र भेंट किए।
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने मुखारबिंद से प्रवचन देते हुए कहा कि मैं लगभग 1150 किलोमीटर की दूरी से आ रहा हूं और पहली बार गुडग़ांव आया हूं। जहां हम रहते थे वहां हरियाली थी, कच्चे मकान थे, ऊंची इमारतें कम थीं और खाना शुद्ध था। इसलिए बीमारियां भी कम थीं। लेकिन जैसे-जैसे मैं दिल्ली के पास और गुरुग्राम आया, देखा कि यहां ऊंची-ऊंची इमारतें हैं। गर्मी से हाल बेहाल है। हरियाली कम है और इसी वजह से बीमारियां ज्यादा हैं। यहां कुएं का पानी नहीं। सप्लाई का पानी है, जिसमें क्लोरीन मिला होता है जो शरीर के लिए हानिकारक है। आरओ से पानी पीते हैं तो उसकी ताकत भी चली जाती है और बीमारी हो जाती है।
मुनिश्री ने समाज को तीन महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि हरियाली के लिए सभी अपने घरों में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं। छत पर नींबू, धनिया, टमाटर के पौधे लगाएं। इससे घर में सब्जी भी मिलेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। जल संरक्षण के लिए आचार्यश्री ने कहा कि जब भी बारिश आए तो उसका पानी इक_ा करके रखें। उस पानी को थोड़ा-थोड़ा पीने में और साधु संतों की आहारचर्या में इस्तेमाल करें। इससे साधुओं का और आपका शरीर दोनों स्वस्थ रहेंगे। इसके लिए प्रदूषण कम करें। एसी का इस्तेमाल न करें और पंखे का इस्तेमाल करें। इससे वातावरण में प्रदूषण नहीं फैलेगा। मुनि श्री के आगमन पर पूरे गुरुग्राम की जैन समाज ने मुनिश्री जी के स्वागत के साथ धर्म लाभ लिया।

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