डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि हल्दी, मेथी दाना और दालचीनी का एक साथ सेवन करने से ब्लड शुगर नियंत्रण, पाचन में सुधार और सूजन कम होना जैसे कई प्रमुख स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।स्वास्थ्य लाभब्लड शुगर नियंत्रण:“दालचीनी, हल्दी और मेथी रक्त शर्करा को कम करने, मधुमेह को रोकने और नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।पाचन तंत्र में सुधार: “पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, ब्लोटिंग, अपच और कब्ज में यह मिश्रण बहुत राहत देता है।.जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत: “हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की अंदरूनी सूजन और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाते हैं।.सेवन का तरीकाकाढ़ा या चाय: एक चम्मच मेथी दाने को रातभर भिगोकर सुबह पानी में उबालें, फिर उसमें चुटकीभर हल्दी और दालचीनी पाउडर मिलाकर छानकर पिएं।डायबिटीज के मरीजों के लिए यह मिश्रण बेहद फायदेमंद माना जाता है। दालचीनी शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है, जबकि मेथी के बीज में मौजूद घुलनशील फाइबर शर्करा के अवशोषण को धीमा कर देते हैं। हल्दी का ‘कर्क्यूमिन’ घटक ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में मदद करता है। दालचीनी और मेथी दोनों ही ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने में फायदेमंद माने जाते हैं। मेथी में घुलनशील फाइबर होता है, जो कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण को धीमा कर सकता है। वहीं, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन भी शरीर की सूजन कम करने के साथ-साथ मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को इस मिश्रण का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।साल 2022 में Food Science and Technology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, दालचीनी और मेथी टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल करने के असरदार विकल्प हैं। 90 दिनों के टेस्ट में रोजाना 4 ग्राम दालचीनी या 20 ग्राम मेथी पाउडर का सेवन फास्टिंग ग्लूकोज और HbA1c के लेवल को काफी कम करने में मदद मिल सकती है। दालचीनी का असर वजन और इंसुलिन पर ज्यादा देखने को मिला। हालांकि, शुगर कम करने में दोनों की क्षमता लगभग एक जैसी रही।







