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पांचवा आयाम (राकेश मिश्रा):मोहाली: दुर्लभ बीमारी, जन्मजात डायाफ्रामिक हर्निया (सीडीएच) से पीड़ित 16 घंटे के एक नवजात शिशु की पार्क अस्पताल, मोहाली में सफल जीवन रक्षक सर्जरी की गई।सीडीएच एक गंभीर जन्मजात विकार है जो लगभग 10,000 में से 1 से 4 नवजात शिशु में देखा जाता है। इसमें डायाफ्राम में छेद होने के कारण पेट के अंग छाती की कैविटी में चले जाते हैं, जिससे फेफड़ों के विकास और सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।गर्भावस्था के दौरान प्रसव-पूर्व अल्ट्रासाउंड के जरिए नवजात शिशु में इस बीमारी का पता चला था। जन्म के तुरंत बाद, बच्चे को सांस लेने में कठिनाई होने लगी और उसे स्थिति को स्थिर करने तथा वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए तुरंत पार्क अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया।जांच के दौरान, डॉक्टरों ने पाया कि लिवर का दाहिना हिस्सा, गॉलब्लैडर, और छोटी व बड़ी आंत के कुछ हिस्से छाती की दाहिनी कैविटी में चले गए थे, जिससे विकसित हो रहे फेफड़े काफी हद तक दब गए थे।बच्चे की स्थिति को सावधानीपूर्वक स्थिर करने के बाद, पार्क अस्पताल, मोहाली की पीडियाट्रिक सर्जन और पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट डॉ. हर्षिता कौर द्वारा एक सफल जीवन रक्षक सर्जरी की गई।डॉ. कौर ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान समय पर बीमारी का पता चलना, डिलीवरी की सही प्लानिंग, विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा नवजात की स्थिति को स्थिर करना और सही समय पर सर्जरी करना ही ऐसे कारक हैं जो सीडीएच के साथ पैदा होने वाले बच्चों के जीवित रहने की संभावना और दीर्घकालिक परिणामों में सुधार करते हैं।सर्जरी के दौरान, अपनी जगह से हटे हुए पेट के अंगों को सावधानीपूर्वक वापस पेट की कैविटी में स्थापित किया गया, और डायाफ्राम में मौजूद लगभग 3 x 2 सेंटीमीटर के छेद को सफलतापूर्वक रिपेयर कर दिया गया।सर्जरी के बाद, बच्चे को नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में विशेष देखभाल और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। अब बच्चे को वेंटिलेटर से सफलतापूर्वक हटा दिया गया है और वह पूरी तरह से दूध फीड ले पा रहा है। बच्चे के स्वास्थ्य में काफी सुधार देखा जा रहा है और अब उसे केवल फेफड़ों के धीरे-धीरे ठीक होने तक कभी-कभार ही मामूली श्वसन सहायता की आवश्यकता पड़ रही है।






