पांचवां आयाम (जसबीर/सच कीरत सिंह), अयोध्या डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में स्वच्छता एवं बागवानी प्रकोष्ठ (आवासीय परिसर) के तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय स्वच्छता उत्प्रेरक कार्यशाला का शनिवार को ईडीपी भवन एवं सरदार वल्लभभाई पटेल प्रशासनिक भवन परिसर में वृहद स्वच्छता अभियान के साथ गरिमामय समापन हुआ। एक माह तक चले इस अभियान ने विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता की नई मिसाल पेश की।कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वित्त अधिकारी पूर्णेन्दु शुक्ल ने स्वच्छता कर्मियों, छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित जनों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि स्वच्छ कार्यस्थल ही बेहतर कार्य संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के परिसर को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो स्वच्छता स्वतः जनआंदोलन का रूप ले सकती है। स्वच्छ परिसर न केवल आगंतुकों को सकारात्मक संदेश देता है, बल्कि समाज को भी प्रेरित करता है।विशिष्ट अतिथि कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने में हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। स्वच्छ वातावरण में ही स्वस्थ मन, सकारात्मक सोच और बेहतर कार्य संस्कृति का विकास होता है। इसलिए स्वच्छता को केवल अभियान नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का संस्कार बनाना होगा।स्वच्छता एवं बागवानी प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुलपति की प्रेरणा एवं अपेक्षाओं के अनुरूप 5 जून 2026 से प्रारंभ हुई 30 दिवसीय स्वच्छता उत्प्रेरक कार्यशाला का प्रथम चरण सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर, स्वस्थ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाना था, जिसे सभी के सहयोग से सार्थक रूप मिला।समापन अवसर पर प्रो. शैलेन्द्र कुमार, प्रो. ए.के. राय, डॉ. राजेश सिंह, सहायक कुलसचिव एस.पी. सावंत सहित बड़ी संख्या में स्वच्छता कर्मियों, छात्र-छात्राओं एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने सहभागिता की। सभी ने स्वच्छता को निरंतर जनभागीदारी से जोड़ते हुए परिसर को सदैव स्वच्छ, सुंदर और प्रेरणादायी बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।






